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Tuesday, March 10, 2026
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Diwali: अलर्ट मोड पर दिल्ली के अस्पताल, पटाखों से जलने वाले मरीजों को मिल सके बेहतर इलाज

Delhi News: दिवाली के त्योहार पर आतिशबाजी के दौरान पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के अस्पतालों में तैयारी की गई है।

नई दिल्ली, (हि.स.)। दिवाली के त्योहार पर आतिशबाजी के दौरान पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के अस्पतालों में तैयारी की गई है। सफदरजंग अस्पताल में बर्न वार्ड के अलावा पटाखे से जलने वाले मरीजों को ध्यान में रखते हुए 20 बेड आरक्षित रखे गए हैं। इसके अलावा दिवाली पर 24 घंटे सभी डॉक्टर और नर्स ड्यूटी पर तैनात रहेंगे। किसी को भी इस दौरान छुट्टी नहीं दी गई है।

अस्पताल में 24 घंटे सेवाएं चालू

दिवाली पर भी पूरी क्षमता के साथ अस्पताल में 24 घंटे सेवाएं चालू रहेंगी। इसके अलावा इमरजेंसी में चार काउंटर अलग से बनाए गए हैं, जिससे कि इमरजेंसी स्थिति में आने वाले मरीजों को भर्ती करने में परेशानी ना हो। इसके साथ ही दिल्ली सरकार के सबसे बड़े अस्पताल लोकनायक में भी 70 बेड का डिजास्टर वार्ड तैयार रखा गया है। वार्ड में जले हुए मरीज के इलाज के लिए सभी आवश्यक सामान की व्यवस्था की गई है।

दिवाली पर इमरजेंसी में डॉक्टर और नर्स रहेंगे मौजूद

अस्पताल में एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी विभाग की उपाधीक्षक डॉक्टर ऋतु सक्सेना ने बताया कि रात के समय भी दिवाली पर इमरजेंसी में डॉक्टर और नर्स की मौजूदगी रहेगी। अस्पताल में पटाखे से जलने का कोई भी मामला आने पर मरीज को तुरंत उपचार दिया जाएगा। अगर मरीज भर्ती करने की स्थिति में होगा तो उसे भर्ती भी किया जाएगा। बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने भी दिवाली पर आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की है। इसके अलावा नगर निगम के हिंदू राव अस्पताल, स्वामी दयानंद हॉस्पिटल और केंद्र सरकार के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बेड आरक्षित किए गए हैं।

पटाखे से जलने के औसतन 50 से 100 मामले सामने आते हैं

उल्लेखनीय है कि राजधानी में 4 से 5 साल पहले जब दिवाली पर पटाखों पर प्रतिबंध नहीं होता था तब पटाखों से जलने के 200 से ढाई सौ मामले आते थे। हालांकि, जब से पटाखों पर बैन लगने लगा है तब से पटाखे से जलने के औसतन 50 से 100 मामले सामने आते हैं। इनमें से कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की भी जरूरत पड़ती है। अधिकतर मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर ही घर भेज दिया जाता है।

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