सहरसा,25 मार्च(हि.स.)। मैथिली के प्रसिद्ध साहित्यकार साहित्य अकादमी पुरस्कार एवं प्रबोध साहित्य सम्मान से सम्मानित मायानंद मिश्र स्मृति समारोह का आयोजन गुरुवार को पीजी सेन्टर सभागार किया गया। मौके पर विशिष्ट अतिथि डाॅ. देवशंकर नवीन लिखित लोकमान्य मायानंद पुस्तक का विमोचन भी किया गया।कार्यक्रम के प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि डाॅ भीमनाथ झा ने कहा कि लक्ष्मीनाथ गोसाई एवं मंडन मिश्र की पावन धरती पर माया बाबू अद्वितीय साहित्यकार हुए। वह कविता, कथा, गीतल, उपन्यास, समीक्षा, मंचीय उदघोषणा एंव रेडियो स्टेशन के माध्यम से अमिट छाप छोड़ गए।उन्होने जो अमूल्य रचना की वह सदियो तक समाज का पथ प्रदर्शित करेगा ।मैथिली साहित्य में ललित राजकमल मायानंद को त्रिपुंड कहा जाता है ।वे मैथिली भाषा के संरक्षण व संबर्धन के लिए जीवन पर्यन्त मैथिली अभियानी की तरह संघर्षरत रहे। डाॅ देवशंकर नवीन ने कहा कि मायानंद मिश्र सम्पूर्ण मिथिला ही नहीं अपितु पूरे देश के धरोहर है।उनके प्रसिद्ध रचनाओं में,माटि के लोक सोने की नैया, खोता आ चिड़ै,बिहाड़ि पानि पाथर ,धानक लोटा, चंद्रबिदू,आगि मोम पाथर, प्रथमं शैलपूत्री च सहित अन्य प्रसिद्ध कृति है ।वर्ष 1988 में मंत्रपुत्र पुस्तक पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उन्होने मायानंद मिश्र के नाम पर महाविद्यालय में चेयर की स्थापना करते हुए प्रतिवर्ष स्मृति समारोह का आयोजन करने की मांग की ।कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/चंदा




