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Sunday, March 29, 2026
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बक्सर स्थित गोकुल जलाशय पर्यटकिय सम्भावनाओं से लबरेज है -पर उपेक्षित भी

बक्सर 16 जून (हि.स.)। जिला मुख्यालय से तीस किलोमीटर की दूरी पर बिहार -यूपी के सीमावर्ती गंगा तट के समीप पचीस किलोमीटर के दायरे में फैला गोकुल जलाशय अपनी गोद में असीम पर्यटकीय सम्भावनाओं को समेटे हुए है। मानसून शुरू होते ही यहां की प्रकृतिक दृश्य बरवस ही लोगो को अपनी ओर खीच लेती है।दुर्लभ प्रजाति के काले हिरन ,सायबेरियन पक्षियों के कलरव अन्य जंगली जानवर और पक्षियों को देखने के लिए बिहार -यूपी के लोगो का समूह भी बरसात के साथ मानसून से आनन्दित होने के लिए आते ही रहते है।यह सिलसिला अगस्त माह तक जारी रहता है। दुर्लभ प्रजाति के काले हिरन को देखते हुए स्थानीय प्राकृतिक प्रेमियों में आक्रोश इस बात को लेकर है कि अगर बिहार पर्यटन विभाग इन हिरनों को संरक्षित करे तो विलुप्त होते हिरन के इस प्रजाति को नव जीवन दिया जा सकता है,लेकिन नही मानसून के दौरान जुलाई और अगस्त माह के दौरान गंगा में बाढ़ कि स्थिति बनने पर सम्पूर्ण जलाशय जलमग्न हो जाता है ऐसे में हिरन ग्रामीण क्षेत्रो कि ओर पलायन करते है।जहां बहुतेरे संख्या में इन हिरनों का शिकार किया जाता है। इस बात से प्रशासन भी अवगत है।पर इन दुर्लभ हिरनों को संरक्षण देने की दिशा में सरकार व् जिला प्रशासन का कोई ठोस कदम ना उठाना चिंता का सबब है। भगौलिक सर्वे के अनुसार 1955 के दौरान भीषण कटाव को लेकर जब गंगा ने मार्ग परिवर्तित किया था। इसी वक्त गोकुल जलाशय का निर्माण हुआ था।बाद के दिनों में पचीस किलोमीटर के दायरे में जब स्वतः प्राकृतिक रूप से यह जलाशय विकसित हुआ, तो प्रजनन के लिए माकूल मौसम से आकृष्ट हो साईबेरियन पक्षियों ने यहा अपना बसेरा बना लिया।जनवरी से जुलाई महीने के अंत तक रहने के बाद पुनः ये अपने वतन को लौट जाते है। हजारो किलोमीटर कि दूरी तय कर आये इन प्रवासी पक्षियों का भी स्थानीय लोग शिकार कर दावत उड़ाते है। गंगा और धर्मावती नदी के कछार में निर्मित गोकुल जलाशय चक्की गायघाट ,बलुआ ,चन्द्रपुरा ,नैनीजोर समेत दियाराक्षेत्र से जुड़े हजार लोगो को रोजगार उपलब्ध कराता है।मछुआरे जलाशय कि मछलियों से और सब्जी उत्पादक किसान सब्जियों का उत्पादन कर अपनी आजीविका चलाते है। वर्ष 2012 के दौरान 3,711 करोड़ रूपये की राशि गोकुल जलाशय को पर्यटकीय क्षेत्र में विकसित करने के लिए सरकार द्वारा तय की गई थी। फ़ाइल अब भी गर्त में है ।पर्यटन विभाग द्वारा बीस किलोमीटर लम्बे और तीन सौ मीटर चौड़े नौकायान के रूप में विकसित करने का वादा दिवास्वप्न् के शिवा कुछ भी नही। हिन्दुस्थान समाचार/अजय मिश्रा

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