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Wednesday, March 25, 2026
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बिहार की महुआ है 2025 की सबसे तीखी सीटों में से एक, तेज प्रताप बनाम मुकेश रौशन में कौन पीछे, कौन आगे?

बिहार चुनाव नतीजों के दौरान जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेजप्रताप यादव ने महुआ सीट से अपनी जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि वे एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं करते और जनता ने उनके काम पर भरोसा जताया है।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । बिहार की राजनीति आज उस मुकाम पर खड़ी है जहाँ एक सीट पूरे राज्य की दिशा बदल सकती है और वह सीट है महुआ। सुबह-सुबह मतगणना शुरू होते ही यहां का माहौल चुनावी रोमांच और राजनीतिक तनाव से भर गया। हर राउंड के रुझान के साथ महुआ की धड़कनें तेज हो रही हैं और राजनीतिक गलियारों में सन्नाटा। क्योंकि यहां देखने को मिल रहा है परिवार, पार्टी और प्रतिष्ठा की तिकड़ी का महायुद्ध ।

दरअसल, एक तरफ हैं जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष, लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव, जिन्होंने इस बार राजद छोड़कर अपनी नई पार्टी के साथ मैदान संभाला है। दूसरी ओर हैं राजद के मौजूदा विधायक मुकेश रौशन, जिन्हें तेजस्वी यादव का खुला समर्थन और पार्टी का पूरा संगठनात्मक बल हासिल है। महुआ आज भाई बनाम पार्टी की सबसे बड़ी लड़ाई देख रहा है। तेज प्रताप यादव ने 2015 में यहीं से पहली बार विधानसभा में कदम रखा था। 2020 में वे हसनपुर चले गए, लेकिन इस बार अपने परिवार की पार्टी नहीं, बल्कि अपनी खुद की पार्टी JJD के साथ।

उन्होंने चुनाव प्रचार में बार-बार कहा कि “महुआ मेरा घर है, मैं यहीं का हूँ और जनता मुझे एक बार फिर आशीर्वाद दे।” तेज प्रताप ने प्रचार को भावनात्मक रंग दिया और उनके समर्थकों ने इसे आत्मसम्मान की लड़ाई बना दिया। वहीं मुकेश रौशन इस चुनावी संघर्ष को राजद की विरासत की रक्षा के रूप में देख रहे हैं। 2020 में वे महुआ से जीते थे और इस बार सीट बचाना उनके राजनीतिक भविष्य का सवाल है। तेजस्वी यादव की रैलियों में उमड़ी भीड़ ने रौशन के पक्ष में माहौल जरूर बनाया, और राजद ने महुआ को प्रेस्टीज सीट घोषित करके पूरी ताकत झोंक दी।

जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे और बड़े चेहरा, यहां सब दांव पर

वैशाली जिले की यह सीट सामाजिक रूप से बेहद संवेदनशील है। यादव, ब्राह्मण, दलित और वैश्य मतदाताओं की मौजूदगी इसे चुनावी समीकरणों का पिघलता हुआ कुंड बनाती है। तेज प्रताप यादव अपने यादव वोटबैंक और युवा समर्थकों पर भरोसा कर रहे हैं। उनके रोड शो में नारेबाजी की गूंज सुनाई देती थी। वहीं मुकेश रौशन के साथ पार्टी का कैडर, बूथ स्तर तक फैला संगठन और तेजस्वी का चेहरा मजबूती दे रहा है। विकास, सड़कें, अस्पताल, रोजगार और किसानों के सवाल यहां के चुनावी मुद्दों में प्रमुख रहे। दोनों उम्मीदवारों ने इन मुद्दों पर वादे, विजन और योजनाओं की फेहरिस्त पेश कर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की।

मतगणना में उबाल

 अब मतगणना में आज कभी तेज प्रताप आगे, कभी रौशन बढ़त में दिखाई दे रहे हैं। महुआ में दोनों ओर के प्रशंसकों की सांसें अटकीं हैं। आज सुबह मतगणना शुरू होते ही महुआ में लग रहा था जैसे हम किसी युद्धभूमि में हैं। पहले राउंड में तेज प्रताप आगे निकले, अगले राउंड में रौशन बढ़त बना ले गए। हर राउंड के बाद माहौल बदलता जाता है। गिनती केंद्र के बाहर समर्थक नारे लगा रहे हैं, हाथों में पार्टी के झंडे, चेहरों पर उत्सुकता और दिलों में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। पुलिस की भारी तैनाती के बीच दोनों खेमों के नेता लगातार अंदर-बाहर हो रहे हैं।

अब देखना ये है कि आखिर कौन जीतेगा? तेज प्रताप की जीत का मतलब होगा नई पार्टी की बड़ी स्वीकार्यता, परिवार की राजनीति में उनकी पुनः वापसी और महुआ में उनके नाम का अपराजेय असर। दूसरी ओर मुकेश रौशन की जीत से यह संदेश जाएगा कि आरजेडी की पकड़ आज भी मजबूत है, तेजस्वी यादव की अपील जमीन पर असर दिखाती है, और जनता स्थिर नेतृत्व पर भरोसा करती है। दोनों की हार या जीत अपने-अपने खेमों में बड़े राजनीतिक प्रभाव डालेगी। यही वजह है कि आज पूरे बिहार की निगाहें महुआ की ओर टिकी हैं।

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