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चीन और भारत की युवा पीढ़ी भविष्य और उम्मीदों की शक्ति

बीजिंग, 2 मई (आईएएनएस)। जहां भारत में हर साल 12 जनवरी यानी स्वामी विवेकानन्द की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, वहां चीन में हर साल 4 मई को युवा दिवस मनाया जाता है। चीन में 4 मई की भावना चीनी राष्ट्र की आत्मा में समाई हुई है और चीन को एक बेहतर स्थान बनाने के लिए युवाओं को प्रेरणा देती है। जाहिर तौर पर यह दिन चीनी युवाओं को अपने सपने साकार करने की प्रेरणा देता है, साथ ही इस बात का भी एहसास करवाता है कि राष्ट्र के पुनरुत्थान और देश के निर्माण में उन्हें अहम योगदान देना चाहिए। चीनी इतिहास के पन्नों को पलटें, तो साल 1919 का चार मई आंदोलन चीन के आधुनिक इतिहास में एक निर्णायक क्षण है, जिसने चीनी देशभक्ति और लोकतांत्रिक प्रयास की शुरूआत की। इस दिन से चीन के राष्ट्रीय जागरण और राष्ट्रीय कायाकल्प की शुरूआत हुई। वर्तमान में, चीन अपने राष्ट्रीय पुनरुत्थान के रास्ते पर चल रहा है और चीनी युवा उस रास्ते को निर्बाध व आसान बना रहे हैं। वहीं, भारत की बात करें तो इस समय भारत की आबादी विश्व में सबसे ज्यादा युवा है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 25 वर्ष की आयु वाले लोगों की संख्या 50 प्रतिशत और 35 वर्ष वाले लोगों आबादी 65 फीसदी है। ये आंकड़े बताते हैं कि भारत दुनिया में सबसे अधिक युवाओं वाला देश है। इसमें कोई संदेह नहीं कि लगभग 60 फीसदी युवा आबादी का भावी समय में देश के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्वरूप में बड़ा योगदान होगा। युवा न केवल देश की भागडोर संभालेंगे बल्कि निर्माण को साकार करेंगे। यकीनन, इसमें कोई संशय भी नहीं होना चाहिए कि चीन और भारत के युवा दोनों देशों की शक्ति है और आने वाले समय का आधार भी है। वे अतीत को भूलकर अपने भविष्य को संवारने के लिए निरंतर काम करते हैं। लेकिन इस भावी उपलब्धि की कल्पना के बीच हमें कुछ जमीनी मुद्दों के बारे में भी सोचना चाहिए। दरअसल, इस समय चीन और भारत दोनों ही देश अनेक परेशानियों से जूझ रहे हैं। चाहे पर्यावरण संकट की बात करें, जल संकट की बात करें, या फिर कोविड महामारी की बात करें। इन सभी समस्याओं का समाधान सिर्फ और सिर्फ युवाओं और नवाचार के जरिये ही किया जा सकता है, और नवाचार आज के समय में सिर्फ युवा वर्ग ही कर सकता है। इसलिए आज युवाओं को जोड़ने, सहभागी बनाने और भविष्य के निमार्ता के रूप में स्थापित करने की जरुरत है। हमने देखा है कि कोविड के प्रकोप ने पूरी दुनिया पर कहर ढाया है। चीनी और भारतीय युवाओं ने जिम्मेदारी निभाते हुए एक नया रूप दिखाया है। दोनों देशों के कई युवा डॉक्टरों, नर्सों, पुलिसकर्मियों और बचावकर्मियों ने अपनी जान को जोखिम में डालते हुए अग्रिम मोर्चा संभाला, और उनके ²ढ़ विश्वास और समर्पण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि युवा दोनों देशों का भविष्य है। यह भी देखा गया है कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर युवाओं के नाम संदेश देते हैं और उनसे संवाद करते हैं। ये दोनों शीर्ष नेता अपने देश की युवा शक्ति को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं और साथ ही सपने साकार करने का जोश भी भरते हैं। 4 मई की भावना, यानी चीनी युवा दिवस चीनी युवाओं के लिए प्रेरणा के अटूट स्रोत के रूप में काम करती रहेगी। दशकों के कठिन संघर्ष के बाद, चीन की नौजवान पीढ़ियों ने चीन को एक गरीब, भूखा और क्रूर अर्ध उपनिवेश से सफलतापूर्वक एक समृद्ध और निर्भर देश के रूप में बदल दिया है। वहीं, भारत की युवा पीढ़ी भी देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। दोनों देशों की युवा पीढ़ी अपने-अपने देश के भविष्य और उम्मीदों की शक्ति है। (लेखक : अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप में पत्रकार हैं) –आईएएनएस आरजेएस

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