नई दिल्ली, रफ्तार। कबाब का नाम सुनते ही इसके शौकीनों के मुंह में पानी आ जाता है। नॉनवेज और वेज कबाब दोनों का अपना मजा है, लेकिन कभी सोचा है कि यह डिश कहां से आई। आज विश्व कबाब दिवस ( 12 जुलाई ) पर हम इस डिश का इतिहास बता रहे हैं। कबाब दिवस की शुरुआत मिडिल ईस्ट के देशों में हुई थी। 14वीं शताब्दी में तुर्की सैनिकों ने सबसे पहले कबाब बनाने की शुरुआत की थी। वहां हैवी मीट को ग्रिल करके पकाया जाता था।
फारसी से निकला है कबाब शब्द
फारसी से कबाब शब्द निकला है। अरबी में इसे कबाब और तुर्की में कबाप कहते हैं। मीट को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट या पीसकर मसालों, तेल और नींबू के रस के साथ मिलाकर कबाब तैयार किया जाता है। कई लोग इसे तवे पर पकाते तो बहुत लोग कबाब को भट्टी या ग्रिलर पर रखकर पकाते हैं।
भारत में सबसे मशहूर गलौटी कबाब
विश्व का सबसे मशहूर कबाब डोनर है। इसमें लैंब का अधिक इस्तेमाल होता है। यह रसदार रहता है। इसमें फ्रेश हर्ब्स और मसालों को मिलाया जाता है। इस कबाब की मीट को छोटे टुकड़ों में काटकर ब्रेड, दही या सलाद संग परोसा जाता है। भारत में गलौटी कबाब सबसे मशहूर है। गलौटी का अर्थ-मुंह में घुल जाने वाला होता है। बताया जाता है कि 17वीं शताब्दी में मिर्जा असद-उल-दौलान, अवध के नवाब वाजिर ने गलौटी कबाब का इजाद किया था। नवाब कबाब खाना बेहद पसंद था। वह बूढ़े होने लगे और उनके दांत गिरने लगे तो शाही महल के शेफ ने गलौटी कबाब बनाने शुरू किए थे। गलौटी कबाब को खाना और पचाना बहुत आसान होता है।
कबाब के कई प्रकार
यूरोप में मुस्लिम समाज की पहचान के रूप में कबाब को जाना जाता रहा है। कबाब मुस्लिम प्रवासियों का चिन्ह बना है। कबाब के कई प्रकार हैं। इसमें सीख, शमी, रेशमी, बिहारी, टिक्का, चिकन, फिश, चपली, पेशावरी, कीमा आदि प्रमुख हैं।
ऐसे बनाएं वेजिटेरियन कबाब
कबाब नॉन वेजिटेरियन के साथ-साथ वेजिटेरियन भी होते हैं। चने और मसूर की दाल से वेजिटेरियन कबाब तैयार किया जाता है। वेजिटेरियन कबाबों में हरी मटर भी डाला जाता है।
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