नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । रुस और यूक्रेन के बीच करीब तीन साल जारी जंग ने कल से यूक्रेनी हमले के बाद एक नया मोड़ ले लिया है। यूक्रेन ने रूस की सीमा के अंदर जाकर 40 से ज्यादा फाइटर जेट्स को ध्वस्त कर दिया। ये हमल यूक्रेन ने ऐसे वक्त पर किया है जब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की तैयारी हो रही थी। यह अटैक इतना सटीक और रणनीति तरीके से किया गया कि करीब 80 साल पूराना हमला ‘नए पर्ल हार्बर’ की चर्चा होने लगी।
यूक्रेन की ओर से रूस पर ये अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है, जिसमें रूस के कई बमवर्षक विमानों को एक झटके में तबाह कर दिया गया। ये एक अचानक की गई एयरस्ट्राइक थी, जिसे रूस रोक नहीं पाया। अब इस हमले को अमेरिका के पर्ल हार्बर अटैक से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि पर्ल हार्बर में आखिर हुआ क्या था?
यूक्रेन नहीं मान रहा हार
रूस और यूक्रेन युद्ध की बात करें तो दोनों देशाों के बीच ये जंग करीब तीन साल से हो रही है। जो खत्म होने की उम्मीद कम ही दिखती है। यूक्रेन हर हाल में रूस के आगे झुकने को राजी नही है। वहीं, रूस भी यूक्रेन पर लगातार हमले कर रहा है। इसी बीच यूक्रेन के हवाई हमले ने तीसरे विश्वयुद्ध का शंखनाद कर दिया है। अब लोगों को वो हमला याद आ रहा है, जिसने परमाणु हमले की तरफ पहला कदम बढ़ाने का काम किया था।
कैसे हुआ था पर्ल हार्बर अटैक?
ये स्टोरी दूसरे विश्व युद्ध के दौरान की है। जो आज इसकी खूब चर्चा में है। इस कहानी में, जब अमेरिका किसी भी हाल में इस विश्वयुद्ध में कूदना नहीं चाहता था। वहीं, जापान को अमेरिका से खतरा महसूस हो रहा था, इसीलिए जापान के शासक ने अमेरिका पर अटैक करने का प्लान बनाया। जापान ने अमेरिका के बड़े बंदरगाह पर्ल हार्बर को अपना निशाना बनाया, यहां अमेरिका के बड़े युद्धपोत और सैन्य पॉवर हुआ करती थी।
पर्ल हार्बर बंदरगाह पर आत्मघाती हमला
7 दिसंबर 1941 की सुबह जापान के कई विमानों ने एक साथ मिलकर पर्ल हार्बर पर बमबारी करना शुरु कर दिया। जापान की ओर से किए गए इस हमले का अमेरिका को अंदाजा भी नहीं था। इस हमले में अमेरिका के 300 से ज्यादा विमान नष्ट हो गए और कई समुद्री जहाज भी तबाह हुए। इस आत्मघाती हमले में अमेरिका सैनिकों के कुल 2400 से ज्यादा जवानों की मौत हो गई थी।
अमेरिका ने जापान के खात्मे की खाई कसम
इस बड़े हमले के बाद अमेरिका ने जापान के खात्मे की कसम खाई और बदला ने की ठान ली। हमले के बाद अमेरिका ने सीधे तौर पर जापान के साथ युद्ध का ऐलान कर दिया गया। इसके साथ ही अमेरिका भी द्वितीय विश्वयुद्ध में कूद गया। अमेरिका ने जापान पर कई हमले किए, लेकिन उस तरह का नुकसान नहीं पहुंचा पाया। इसके बाद जापान को सरेंडर करने के लिए कहा गया, लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद जापान ने ऐसा नहीं किया। आखिरकार 1945 में अमेरिका ने जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नाकासाकी पर परमाणु बम गिरा दिए। इसके बाद जापान को सरेंडर करना पड़ा।




