नई दिल्ली/ रफ्तार डेस्क। प्रसिद्ध इतिहासकार, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक्स स्टूडेंट व रिसर्चर मणिकर्णिका दत्ता ने कभी नहीं सोचा था कि जिस देश में उन्होंने एक दशक से भी अधिक समय बिताया, उस देश में रहने के लिए उन्हें इतना जूझना पड़ेगा। रिपोर्ट के अुनसार भारत को लेकर शोध के चलते उनका काफी समय भारत में बीता है, ऐसे में उन पर निर्वासन की तलवार लटक रही है। ज्यादा समय तक ब्रिटेन से बाहर रहने के चलते उनका ILR का आवेदन ही खारिज कर दिया गया है।
मणिकर्णिका दत्ता 691 दिन भारत में रहीं
दरअसल, एक रिपोर्ट के अनुसार मणिकर्णिका दत्ता ने ब्रिटेन में 10 साल से अधिक रहने के आधार पर Indefinite Leave to Remain (ILR) के लिए आवेदन किया था। ILR एक तरह का इमिग्रेशन स्टेटस है जिसके तहत दूसरे देशों के नागरिक ब्रिटेन में अनिश्चितकाल के लिए रह सकते हैं और वहां काम कर सकते हैं। ILR के तहत ब्रिटेन में विदेशी नागरिकों को अनिश्चितकाल तक रहने का आधिकार तो मिलता है, लेकिन अगर व्यक्ति 548 दिन ज्यादा यूके से बाहर रहे तो ये स्टेटस छिन भी सकता है। मणिकर्निका दत्ता 691 दिन भारत में रहीं, इस वजह से उनका ILR स्टेटस खारिज कर दिया गया।
अब लड़नी होगी कानूनी लड़ाई
इस मामले को लेकर ब्रिटेन के गृह कार्यालय से उन्हें चेतावनी मिली है कि उन्हें ब्रिटेन छोड़कर कहीं और जाना होगाा। यदि वे स्वेच्छा से नहीं जाती हैं तो उन्हें अगले दस साल के लिए प्रवेश प्रतिबंध और ओवर स्टे के लिए कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
मैं 12 साल से यहां रह रही हूं- मणिकर्णिका
वहीं ब्रिटेन के गृह कार्यालय के इस फैसले पर हैरानी जताते हुए उन्होंने कहा कि जब मुझे ई-मेल मिला कि मुझे ब्रिटेन छोड़ना होगा तो मैं स्तब्ध रह गई। मैं 12 साल से यहां रह रही हूं और मैंने अलग-अलग विश्वविद्यालयों में काम किया है। उन्होंने आगे कहा कि मैं ऑक्सफोर्ड में मास्टर्स करने के लिए यहां आई थी और मेरी जिंदगी का बड़ा हिस्सा यहीं पर बीता है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मेरे साथ ऐसा होगा।
2012 में मास्टर डिग्री के लिए आई थीं यूके
37 साल की दत्ता यूनिवर्सिटी कॉलेज डबलिन में सहायक प्रोफेसर हैं। उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में अपने पति डॉ. सौविक नहा के साथ (ILR) के लिए आवेदन किया था। सौविक नहा ग्लासगो यूनिवर्सिटी में औपनिवेशिक इतिहास के सीनियर लेक्चरर हैं। दोनों लंदन में 10 साल से साथ रह रहे हैं। भारत में दत्ता की व्यापक शोध यात्राएं हुई हैं। इस दौरान वह यूके के इमीग्रेशन नियमों के तहत विदेश में रहने के अधिकतम दिनों की सीमा को पार कर गईं। वे 2012 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में मास्टर डिग्री के लिए यूके आई थीं, बाद में डॉक्टरेट रिसर्च किया और ऑक्सफोर्ड और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में पदों पर रहीं।
यूके होम ऑफिस के नियम तोड़े
यूके होम ऑफिस के नियमों के अनुसार ILR आवेदकों को 10 साल की अवधि में अधिकतम 548 दिन देश के बाहर बिताने की अनुमति है। वहीं दत्ता ने इसे 143 दिनों से अधिक कर दिया। इस अधिकतम सीमा को लेकर उन्होंने कहा कि यात्रा में आवश्यक शोध यात्राएं और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शामिल हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ये यात्राएं उनके काम के लिए महत्वपूर्ण थीं। फिलहाल होम ऑफिस ने अगले तीन महीनों में उनके मामले की समीक्षा करने पर सहमति जताई है।





