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Friday, March 20, 2026
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महासागरों को जलवायु परिवर्तन से बचाने के लिये, ‘मार्ग बदलाव’ ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार को “एक महासागर सम्मेलन” को सम्बोधित करते हुए कहा है कि पृथ्वी ग्रह, जलवायु व्यवधान, जैव-विविधता की हानि और प्रदूषण के रूप में तिहरे संकटों का सामना कर रहा है. उन्होंने आगाह करते हुए यह भी कहा है कि इन संकटों का ज़्यादातर बोझ महासागरों को वहन करना पड़ रहा है. ये तो विदित है कि महासागर, कार्बन और तापमान की बड़ी मात्रा को सोख़ लेते हैं, मगर समुन्दर भी अब ज़्यादा गरम हो रहे हैं; और उनमें अम्ल बढ़ रहा है, जिससे उनकी पारिस्थितिकी को नुक़सान पहुँच रहा है. Only 20% of the seabed is mapped. To #SaveOurOcean for real, we need to know it better! This is why we are proud to announce, on the occasion of the #OneOceanSummit, that UNESCO will have at least 80% of the seabed mapped by 2030. Check here for more: https://t.co/Hbdr1sjFeD pic.twitter.com/L5wFvDRswH — UNESCO 🏛️ #Education #Sciences #Culture 🇺🇳😷 (@UNESCO) February 11, 2022 यूएन प्रमुख ने सम्मेलन को अपने वीडियो सन्देश में कहा, “पोलर हिम पिघल रहा है और वैश्विक मौसम रुझान भी बदल रहे हैं.” ‘एक महासागर सम्मेलन’ इस सप्ताह फ्रांस के उत्तरी तटीय शहर ब्रेस्त में हो रहा है. प्रभावों का सिलसिला उन्होंने कहा कि महासागरों पर निर्भर रहने वाले समुदायों को भी भारी नुक़सान उठाने पड़ रहे हैं, “तीन अरब से ज़्यादा लोग, अपनी आजीविकाओं के लिये, समुद्री और तटीय जैव-विविधता पर निर्भर हैं.” उन्होंने समुद्री प्रजातियों में कमी; लुप्त होती प्रवाल भित्तियाँ; तटीय पारिस्थितिकियों का, मैले के नालों से निकासी के कारण विशाल मृत क्षेत्रों में तब्दील होना और प्लास्टिक कूड़े-कचरे के कारण समुद्रों का दम घुँटने जैसे मामलों की मायूस तस्वीर भी पेश की. उससे भी ज़्यादा, मछली पकड़ने के विनाशकारी तरीक़ों और अवैध, गोपनीय व अनियमित मछली शिकार के कारण, मछलियों के वजूद को जोखिम उत्पन्न हो रहा है. क़ानून का पालन यह साल ‘समुद्र के क़ानून पर यूएन कन्वेन्शन’ पर दस्तख़त होने का 40वाँ वर्ष है. एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि महासागरों में क़ानून निश्चितता, बहुत अहम है. उन्होंने बताया कि द्वितीय यूएन महासागर सम्मेलन, इस वर्ष लिस्बन में 27 जून से एक जुलाई तक चलेगा जो टिकाऊ विकास लक्ष्यों की प्राप्ति और पेरिस जलवायु समझौते को लागू करने के वैश्विक प्रयासों में, समुद्रों की भूमिका को मज़बूत करने का एक अवसर होगा. नील अर्थव्यवस्था यूएन प्रमुख ने समुद्रों के संरक्षण के लिये, सघन प्रयासों पर ज़ोर देते हुए कहा कि एक टिकाऊ नील अर्थव्यवस्था, जलवायु संरक्षण के साथ-साथ, आर्थिक प्रगति को आगे बढ़ा सकती है और रोज़गार उत्पन्न कर सकती है. उन्होंने कहा, “हमें समुद्री प्रदूषण के ज़मीन आधारित स्रोतों से निपटने के लिये, और ज़्यादा व असरदार साझेदारियों की दरकार है… साथ ही अपतटीय (Offshore) अक्षय ऊर्जा प्रयोग शुरू करने में तात्कालिकता की ज़रूरत है, जो स्वच्छ ऊर्जा के साथ-साथ रोज़गार भी मुहैया करा सकती है, और जिससे समुद्री अर्थव्यवस्था में जीवाश्म ईंधन का कम प्रयोग होगा.” यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने एकल प्रयोग वाले प्लास्टिक को बन्द करने के लिये, फ्रांस सहित, कुछ देशों द्वारा उठाए गए उत्साहजनक क़दमों का स्वागत किया और अन्य देशों से भी ऐसा ही करने का आग्रह किया. प्रकृति आधारित समाधान WMO/Hwang Seonyoung तापमान वृद्धि का मतलब है कि ज़्यादा समुद्री हिम पिघलेगा, जिससे समुद्रों का तापमान बढ़ेगा, और पानी गरम होगा – और अन्ततः पारिस्थितिकी और वैश्विक मौसम रुझान प्रभावित होंगे. यूएन महासचिव ने कहा कि विश्व व्यापार का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा, समुद्री मार्गों से होता है मगर, जहाज़रानी गतिविधियाँ (Shipping), वैश्विक ग्रीनहाउस गैसों के लगभग तीन प्रतिशत कार्बन उत्सर्जन के लिये ज़िम्मेदार हैं. यूएन प्रमुख ने कहा, “शिपिंग सैक्टर को कार्बन उत्सर्जन में 2030 तक, 45 प्रतिशत कमी लाने और वर्ष 2050 तक शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य में योगदान करना होगा. इस सदी के अन्त तक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने की हमारी उम्मीदों को जीवित रखने के प्रयासों के लिये, यह बहुत अहम है.” तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों में अनुकूलन व सहनक्षमता बढ़ाया जाना भी बहुत ज़रूरी है, जिनके आवास व आजीविकाएँ जोखिम के दायरे में हैं. उन्होंने कहा, “हमें मैंग्रोव यानि समुद्री क्षुप या वृक्ष और समुद्री घास जैसे प्रकृति आधारित समाधान मुहैया कराने वाले अवसरों को भुनाना होगा.” टिकाऊ समुद्री अर्थव्यवस्था यूएन महासचिव ने कहा कि एक टिकाऊ समुद्री अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये, वैश्विक साझेदारियों और निवेश की ज़रूरत है, जिनमें समुद्र विज्ञान को बढ़ा हुआ समर्थन भी शामिल हो, ताकि हमारी कार्रवाई, समुद्रों के बारे में जानकारी और समझ पर आधारित हो. उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ ऐसा बचा हुआ है जिसमें झाँका नहीं गया है, उसका जायज़ा नहीं लिया गया है और जिसकी सम्भावनाओं के बारे में, उपयुक्त जानकारी हासिल नहीं की गई है. एंतोनियो गुटेरेश ने ‘टिकाऊ विकास के लिये समुद्री विज्ञान के यूएन दशक’ के दौरान, हर जगह सम्बद्ध नागरिकों को, भविष्य की पीढ़ियों की ख़ातिर, एक स्वस्थ नील ग्रह मुहैया कराने का, सामूहिक वादा पूरा करने के लिये काम करने को प्रोत्साहित किया. –संयुक्त राष्ट्र समाचार/UN News

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