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Sunday, March 22, 2026
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बांग्लादेश के बाद अब थाईलैंड की बारी, थाई PM श्रेथा थाविसिन को कोर्ट ने पद से हटाया, ये हैं कारण…

Thailand: इस मामले में संवैधानिक अदालत के जजों ने 5-4 से थाईलैंड के प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन के खिलाफ यह आदेश सुनाया है। अब अदालत के इस फैसले के बाद थाईलैंड में सियासी हलचल बढ़ गयी है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। थाईलैंड में वहां की संवैधानिक अदालत ने प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन पर बहुत बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल संवैधानिक अदालत ने थाईलैंड के प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन को 14 अगस्त 2024 को उनके पद से हटा दिया है। संवैधानिक अदालत ने नैतिकता संहिता का उल्लंघन करने के मामले में श्रेथा थाविसिन पर यह कार्रवाई की है। इस मामले में संवैधानिक अदालत के जजों ने 5-4 से थाईलैंड के प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन के खिलाफ यह आदेश सुनाया है। अब अदालत के इस फैसले के बाद थाईलैंड में सियासी हलचल बढ़ गयी है। 

प्रधानमंत्री को वकील पिचिट चुएनबान के अपराध की पूरी जानकारी थी

बता दें कि प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन ने अप्रैल 2024 में अपराधिक वकील पिचिट चुएनबान को अपने मंत्रिमंडल में नियमों की अनदेखी करके नियुक्त कर लिया था। प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन ने अपराधिक वकील पिचिट चुएनबान को प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री के रूप में नियुक्त किया था। संवैधानिक अदालत ने प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन के खिलाफ यह फैसला अपराधिक वकील पिचिट चुएनबान की प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री के रूप में नियुक्ति को लेकर सुनाया है। अदालत का कहना है कि प्रधानमंत्री श्रेथा थाविसिन को अपराधिक वकील पिचिट चुएनबान के अपराध की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए अपराधिक वकील पिचिट चुएनबान की अपने मंत्रिमंडल में नियुक्ति की थी। 

पिचिट को यह सजा एक जज को रिश्वत देने की कोशिश को लेकर हुई थी

बता दें कि अपराधिक वकील पिचिट चुएनबान को वर्ष 2008 में कोर्ट की अवमानना के मामले में उस समय 6 महीने की सजा हो चुकी है। अपराधिक वकील पिचिट चुएनबान को यह सजा एक जज को पूर्व प्रधानमंत्री थाकसिन शिनवात्रा के मामले में 20 लाख बाहत यानि कि 55 हजार अमेरिकी डॉलर की रिश्वत देने की कोशिश को लेकर हुई थी। 

तब तक वर्तमान कैबिनेट कार्यवाहक आधार पर बनी रहेगी

वहीं संवैधानिक अदालत ने आदेश दिया है कि जब तक संसद नया प्रधानमंत्री नियुक्त नहीं कर लेती है, तब तक वर्तमान कैबिनेट कार्यवाहक आधार पर बनी रहेगी। संवैधानिक अदालत ने अपने फैसले में संसद को नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए कोई समय सीमा नहीं दी है।   

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