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Friday, March 6, 2026
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स्विट्जरलैंड ने भारत से Most Favoured Nation का दर्जा वापस लिया, अब भारतीय कंपनियों को उठाना होगा नुकसान

स्विट्जरलैंड ने दोहरे कराधान से बचने के लिए भारत के साथ अपने समझौते में मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) प्रावधान को निलंबित कर दिया है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । स्विट्जरलैंड ने दोहरे कराधान से बचने के लिए भारत के साथ अपने समझौते में मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) प्रावधान को निलंबित कर दिया है। इस फैसले के बाद स्विट्जरलैंड में काम करने वाली भारतीय कंपनियों और भारत में स्विस निवेश पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। एमएफएन दर्जा वापस लेने की घोषणा करते हुए, स्विट्जरलैंड के वित्त विभाग ने कहा है कि यह कदम पिछले साल भारत के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संदर्भ में उठाया गया है। स्विट्जरलैंड ने अपने फैसले के लिए नेस्ले मामले में 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। तैयार खाद्य उत्पादों के व्यवसाय में लगी नेस्ले का मुख्यालय वेवे, स्विट्जरलैंड में है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि डीटीएए को तब तक लागू नहीं किया जा सकता जब तक कि इसे आयकर अधिनियम के तहत अधिसूचित नहीं किया जाता है। इस फैसले का मतलब है कि नेस्ले जैसी स्विस कंपनियों को लाभांश पर अधिक कर देना होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को पलट दिया था, उस आदेश ने यह सुनिश्चित किया कि विदेशी संस्थाओं में या उनके लिए काम करने वाली कंपनियों और व्यक्तियों पर कोई दोहरा कराधान (दोहरी कराधान संधि) नहीं होगा।

उल्‍लेखनीय है कि मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा एक ऐसा प्रोटोकॉल है जो भारत और स्विट्जरलैंड के बीच दोहरे कराधान बचाव समझौते का हिस्सा है। स्विट्ज़रलैंड ने कहा कि समझौते के सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र प्रावधान को निलंबित कर दिया गया है। इस दर्जे को वापस लेने का मतलब है एक जनवरी, 2025 से स्विट्जरलैंड भारतीय कंपनियों द्वारा उस देश में अर्जित लाभांश पर 10 प्रतिशत कर लगाएगा।

स्विट्जरलैंड के इस कदम से भारत में निवेश पर पड़ सकता है असर

टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि स्विट्जरलैंड के इस कदम से भारत में निवेश पर असर पड़ सकता है। इसका कारण यह है कि लाभांश पर अधिक विदहोल्डिंग टैक्स लगाया जाएगा। इससे इस साल मार्च में हुए व्यापार समझौते के तहत चार देशों के यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ द्वारा 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता को खतरा है। ईएफटीए आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड का एक अंतरसरकारी समूह है। वहीं, स्विस सरकार के इस फैसले पर टैक्स सलाहकार नांगिया एंडरसन के टैक्स पार्टनर ने कहा कि अब स्विट्जरलैंड में काम करने वाली भारतीय इकाइयों की टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। इनके अलावा एकेएम ग्लोबल फर्म के टैक्स पार्टनर अमित माहेश्वरी स्‍वि‍स सरकार के इस फैसले को लेकर कहते हैं कि इससे भारत में स्विस निवेश प्रभावित हो सकता है, क्योंकि एक जनवरी, 2025 को या उसके बाद की आय पर मूल दोहरे कराधान संधि में निर्दिष्ट दरों पर कर लगाया जा सकता है।

भारत की प्रतिक्रिया भी आई सामने

अब इस निर्णय पर भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आई है । भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल का कहना है कि यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के सदस्य देशों के साथ व्यापार समझौतों के मद्देनजर स्विट्जरलैंड के साथ उसकी दोहरी कराधान संधि पर फिर से बातचीत करने की आवश्यकता हो सकती है। उन्‍होंने कहा, “मुझे लगता है कि स्विट्जरलैंड के साथ ईएफटीए के कारण हमारी दोहरी कराधान संधि पर फिर से बातचीत होगी।”

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