नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। छोटे निवेशकों को भी अब एल्गो ट्रेडिंग में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा, इतना ही नहीं निवेशक अब अधिक बार शेयर मार्केट से मुनाफा भी कमा सकते हैं। हाल ही में बाजार नियामक सेबी रिटेल निवेशकों के लिए एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग की सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव लाया है। यह तकनीक कंप्यूटर प्रोग्राम के माध्यम से ट्रेडिंग को तेज और पारदर्शी बनाती है। गौरतलब है कि अब तक यह सुविधा केवल संस्थागत निवेशकों को मिलती थी।
SEBI ने अपने कंसल्टेशन पेपर में मौजूदा नियमों में कुछ सिक्योर टेक्निक जोड़कर छोटे इंन्वेस्टर्स को भी एल्गो ट्रेडिंग में हिस्सा लेने की सुविधा देने का प्रस्ताव रखा है। सेबी द्वारा इन प्रस्तावों पर 3 दिसंबर तक जनता से राय मांगी गई है। MMC Global Securities Limited के डायरेक्टर और CEO अजय गर्ग ने इस प्रस्ताव को समय की जरूरत बताते हुए कि नए फ्रेमवर्क के अनुसार रिटेल निवेशक केवल रजिस्टर्ड ब्रोकरों से अप्रूव्ड एल्गो का उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि अल्गो ट्रेडिंग का यह प्रस्तावित फ्रेमवर्क रिटेल निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के साथ ही उन्हें बेहतर मुनाफा कमाने में भी मदद करेगा।
जानिए Algo Trading क्या है?
Algo Trading को ऑटोमेटेड ट्रेडिंग या प्रोग्राम्ड ट्रेडिंग भी कहा जाता है। एल्गो नाम एल्गोरिदम से बना है, यह एक कंप्यूटर प्रोग्राम के जरिए संचालित होती है, जो ट्रेड करने के लिए तय निर्देशों (एल्गोरिदम) को फॉलो करता है। ऐसा माना जाता है कि इसमें बहुत तेजी से और अधिक बार प्रॉफिट जनरेट हो जाता है।
यह कैसे करती है काम?
मान लीजिए कि निवेशक किसी कंपनी के 50 शेयर उस समय खरीदना चाहते हैं, जब उसका 50-डे मूविंग एवरेज 200-डे मूविंग एवरेज को पार कर जाए। निर्देश के मिलते ही कंप्यूटर प्रोग्राम शेयर की कीमतों को ऑटोमेटिक मॉनिटरिंग करके खरीद का ऑर्डर प्लेस कर देता है। इसमें निवेशक को शेयर्स की लाइव कीमतों और ग्राफ्स को लगातार मॉनिटरिंग करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसलिए लाया गया है यह प्रस्ताव
मार्केट में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सेबी ने डायरेक्ट मार्केट एक्सेस सुविधा के माध्यम से एल्गो ट्रेडिंग शुरू की थी। इससे मिले फायदों में ऑर्डर जल्दी पूरे होना, कम ट्रांजैक्शन कॉस्ट, ज्यादा पारदर्शिता, बेहतर ऑडिट ट्रेल्स और लिक्विडिटी में सुधार शामिल हैं। लेकिन यह सुविधा केवल बड़े इंवेस्टर्स तक ही सीमित रही।





