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Thursday, March 19, 2026
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…तो क्या अमेरिका WHO को छोड़ देगा? Donald Trumph पुराने फैसले पर लगा सकते हैं मुहर

डोनाल्ड ट्रंप शपथ लेने के बाद कुछ पुराने विवादास्पद मुद्दों पर अपना रुख फिर से रख सकते हैं, जिनमें से एक विश्व स्वास्थ्य संगठन से अमेरिका का अलग होना भी है।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को अपने दूसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेंगे। इस दौरान ट्रंप कुछ पुराने विवादास्पद मुद्दों पर अपना रुख फिर से रख सकते हैं, जिनमें से एक विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अमेरिका का अलग होना भी है। ट्रंप पहले भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पर चीन का पक्ष लेने का आरोप लगा चुके हैं और वह अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में उस फैसले पर पुनर्विचार कर सकते हैं।

वाशिंगटन में जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के वैश्विक स्वास्थ्य प्रोफेसर लॉरेंस गोस्टिन के अनुसार ट्रंप की टीम निर्णय की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि ट्रंप अपने कार्यकाल की शुरुआत में या कुछ दिनों के भीतर WHO से हटने की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि, ट्रंप या उनकी टीम की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई कड़ा बयान नहीं दिया गया है। ट्रंप ने वैक्सीन विरोधी माने जाने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए रॉबर्ट कैनेडी जूनियर को अपनी नई टीम में स्वास्थ्य सचिव नियुक्त किया है। उनका मानना है कि टीके शरीर में कई समस्याएं पैदा कर सकते हैं, जिसके कारण उनके उपयोग पर कई विवाद हुए हैं। इससे पहले ऐसी कोई चर्चा नहीं थी कि अमेरिका डब्ल्यूएचओ से मुक्त हो जायेगा, लेकिन 2020 में जब ट्रम्प अमेरिकी राष्ट्रपति थे तब उन्होंने WHO से हटने का फैसला किया और इसके लिए प्रक्रिया भी शुरू की। हालांकि, छह महीने बाद जब जो बाइडेन ने पदभार संभाला तो यह निर्णय पलट दिया गया। अब जब ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति बनने वाले हैं तो संभव है कि वह इस फैसले को फिर से लागू कर दें।

ट्रंप WHO को चीन की कठपुतली मानते हैं

ट्रंप ने बार-बार WHO पर आरोप लगाया है कि वह कोविड-19 मुद्दे के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश नहीं कर रहा है और चीन का समर्थन कर रहा है। ट्रम्प के अनुसार, चीन का विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पर पूर्ण नियंत्रण है, जिसमें पारदर्शिता का अभाव है और इसलिए महामारी के दौरान गलत जानकारी प्रसारित की गई थी। अगर अमेरिका WHO से हटता है, तो इसका भविष्य के वैश्विक स्वास्थ्य संकटों से निपटने की तैयारियों पर बड़ा असर पड़ेगा, क्‍योंकि दुनिया के देशों में अमेरिका अकेला ही दुनिया के कई देशों के बराबर की फंडिंग हर साल विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को करता है।

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