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Thursday, March 5, 2026
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इस जादूगर ने 12 साल की उम्र में हासिल कर ली थी गणित में महारत, जानिए उनकी उपलब्धियां

रामानुजन ऐसे महान गणितज्ञ थे जिन्होंने भारत में अंग्रेजी शासन काल के दौरान विश्व में भारत का परचम लहराया था।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । इस खबर में टैग लगा दीजिएगा… गणित के जादूगर कहे जाने वाले महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन ने महज 12 साल की उम्र में ही त्रिकोणमिति में महारत हासिल कर ली थी। आज उनकी 102वीं पुण्यतिथि है। इस लेख के माध्‍यम से जानिए उनके जीवन और उपलब्धियों के बारे में- 

रामानुजन ऐसे महान गणितज्ञ थे जिन्होंने भारत में अंग्रेजी शासन काल के दौरान विश्व में भारत का परचम लहराया था। उन्होंने सिर्फ 12 साल की उम्र में ही त्रिकोणमिति में महारत हासिल कर ली थी। इतना ही नहीं उन्‍होंने खुद से बिना किसी की सहायता के कई प्रमेय यानी थ्योरम्स बनाए थे। 

तमिलनाडु के इरोड गांव में हुआ था जन्‍म 

श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 में तमिलनाडु के इरोड गांव में हुआ था। वे बचपन में सामान्‍य बच्चों की तरह नहीं थे। 3 साल की उम्र तक वे कुछ बोल नहीं पाए थे। इस महान गणितज्ञ ने तमिल भाषा से शिक्षा प्राप्‍त की थी। हालांकि पढ़ाई में उनका मन ज्‍यादा नहीं लगता था, फ‍िर भी प्राइमरी परीक्षा में उन्होंने पूरे जिले में पहला स्थान प्राप्‍त किया था। 

13 साल की उम्र में त्रिकोणमिति को किया हल

पहली बार उच्च माध्यमिक स्कूल से उन्‍होंने गणित की पढ़ाई शुरू की थी। इसके बाद वे गणित विषय में महारत हासिल करते गए । जब वे सातवीं कक्षा में पढ़ते थे तब उन्होंने बीए के छात्रों को गणित के सवाल समझाए थे। उन्होंने सिर्फ 13 साल की उम्र में त्रिकोणमिति को हल कर दिया था, जिसे सॉल्‍व करने में बड़े से बड़े विद्वान भी असफल हो जाते थे।

5000 से अधिक थ्योरम्स को किया सिद्ध

श्रीनिवास ने 16 साल की उम्र में 5 हजार से ज्‍यादा थ्योरम्स को प्रमाणित कर दिखाया था। उन्हें गणित के अलावा किसी दूसरे विषय में बिलकुल भी इंटरेस्ट नहीं था। वे 11वीं कक्षा में गणित को छोड़कर अन्‍य सभी विषयों में फेल तक हो गए थे। प्राइवेट परीक्षा देकर भी वे 12वीं कक्षा पास नहीं कर पाए थे ।

आर्थिक तंगी का करना पड़ा सामना

श्रीनिवास ने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे। बारहवीं की पढ़ाई के बाद आर्थिक तंगी के कारण वे नौकरी की तलाश में जुट गए। तब उनकी मुलाकात डिप्टी कलेक्टर वी रामास्वामी अय्यर से हुई थी। वे भी गणित के बहुत बड़े विद्वान थे, उन्होंने रामानुजन की प्रतिभा को अच्छे से पहचान लिया था। ऐसे में उन्‍होंने ₹25 की मासिक छात्रवृत्ति की व्यवस्था की थी।

जब जौहरी को हुई थी हीरे की पहचान

हार्डी रामानुजन से इतने प्रभावित हो गए कि उन्होंने तुरंत रामानुजन को लंदन बुलाने के लिए आमंत्रित किया। हार्डी ने रामानुजन को दुनिया का महान गणितज्ञ बताया था। दोनों ने मिलकर गणित की कई रिसर्च पेपर पब्लिश किए। 1729 नंबर हार्डी-रामानुजन नंबर के रूप में काफी प्रसिद्ध है। उनके रिसर्च को अंग्रेजों ने भी सम्मान दिया।

ये हैं महान गणितज्ञ की विशेष उपलब्धियां

रामानुजन को साल 1917 में उन्हें लंदन मैथमेटिकल सोसायटी के लिए चुना गया। उन्‍होंने बिना किसी सहायता के हजारों इक्वेशन संकलित की । उन्‍होंने riemannn series, the elliptic integrals, hypergeometric series और जटा फंक्शन के समीकरणों (equations) पर काम किया। इस महान गणितज्ञ ने अपने पूरे जीवन में करीब 3900 थ्योरम तैयार की। इतिहास में रामानुजन से कम आयु का कोई सदस्य आज तक नहीं हुआ। 

रामानुजन को हो गई थी टीबी की बीमारी 

रामानुजन को 1919 में टीबी की बीमारी हो गई थी। इसी दौरान उन्‍होंने मॉक थीटा फंक्शन पर एक शोध पत्र भी लिखा था। जिसका उपयोग गणित के साथ ही चिकित्सा विज्ञान में कैंसर को समझने के लिए होता है। ये अपने आप में अद्भुत और अकल्पनीय है। बीमारी के चलते 33 साल की उम्र में 26 अप्रैल 1920 को उन्होंने कुंभकोणम में अपनी अंतिम सांस ली। श्रीनिवास रामानुजन की जीवनी ‘द मैन हू न्यू इनफिनिटी” 1991 में प्रकाशित हुई थी। 2015 में इसी पर आधारित फिल्म द मैन हू न्यू इनफिनिटी रिलीज हुई थी।

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