नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। विश्व हिंदू महासंघ के यूरोपीय अध्यक्ष दीपन मित्रा ने हाल ही में यहां अल्पसंख्यक मुद्दों पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र के 17वें सत्र में भाग लिया। इस बार उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के चल रहे नरसंहार की विस्तार से जानकारी सभी के सामने रखी और संयुक्त राष्ट्र से उनकी सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की।
तुरंत संयुक्त राष्ट्र शांति सेना को बांग्लादेश भेजा जाए
मित्रा ने संयुक्त राष्ट्र से मांग की कि ‘बांग्लादेश में 28 लाख हिंदू अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए तुरंत संयुक्त राष्ट्र शांति सेना को बांग्लादेश भेजा जाए।’ इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की निंदा करनी चाहिए और इस संबंध में बांग्लादेश पर दबाव भी बनाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र के इस सत्र में अध्यक्ष अनास्तासिया क्रिकल थीं जबकि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष उमर ज़निबार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विभाग के अध्यक्ष वोल्कर तुर्क साथ ही प्रो. निकोलस लेवराट सह-अध्यक्ष थे।
बांग्लादेश में कट्टरवाद हावी हो गया है?
इस अवसर पर बांग्लादेश में समस्याओं, चुनौतियों और बाधाओं की पहचान करने पर भी चर्चा की गई। साथ ही ‘वर्ल्ड हिंदू फेडरेशन’, ‘पीस फाउंडेशन यूके’, ‘इंटरनेशनल सेक्युलर मूवमेंट यूके’, ‘ग्लोबल हिंदू कोएलिशन’, ‘सनातन एसोसिएशन लंदन’, ‘परबत्ता चटगांव जन्महती समिति’, ‘सेक्युलर मूवमेंट यूके’, ‘बांग्लादेश क्रिश्चियन एसोसिएशन’ और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार जैसे विषयों पर अलग से सत्र हुए हैं, जिसमें विस्तार से बताया गया कि किस कदर बांग्लादेश में कट्टर वाद हावी हो गया है। यहां इस वक्त अल्पसंख्यक लगातार निशाने पर है और उनकी संपत्तियां लूटी जा रही हैं तथा कई लोग पिछले चार माह में कट्टरवादियों द्वारा मौत के घाट उतार दिए गए हैं। वहीं, जिनेवा में ‘बांग्लादेश मिशन’ के एक प्रतिनिधि ने इस बात से इनकार किया कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है। उनके ये कहे जाने पर दीपन मित्रा ने वहां हिंदुओं पर अत्याचार की खबरों का हवाला दिया और उनकी कड़ी निंदा की।
CM ममता ने कहा है कि हमारा परिवार बांग्लादेश में रहता है
भारत में भी बांग्लादेश में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना भेजने की मांग उठने लगी है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यह भी मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए। साथ ही बिना देर किए संयुक्त राष्ट्र शांति सेना वहां तैनात कर देनी चाहिए।
ममता बनर्जी ने कहा है कि हमारा परिवार बांग्लादेश में रहता है, उनके पास कई संपत्तियां हैं। इस मुद्दे पर भारत सरकार जो भी रुख अपनाएगी हम उसे स्वीकार करेंगे। हम दुनिया में कहीं भी धर्म आधारित अत्याचारों की निंदा करते हैं। इसलिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री से अपील करती हूं कि बांग्लादेश में जारी हिंसा में हस्तक्षेप करें। उन्होंने कहा है कि हम बांग्लादेश में भारतीयों पर हो रहे हमलों को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हिंसा पीड़ित भारतीयों को बचाकर भारत लाने और उनका पुनर्वास करने की तत्काल आवश्यकता है। जरूरत पड़ने पर हमें अपनी थाली से ‘एक रोटी’ उनके साथ बांटने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें भोजन की कोई कमी नहीं होगी। ममता बनर्जी ने बांग्लादेश और अन्य जगहों पर रहने वाले सभी समुदायों के बीच सद्भाव, भाईचारे और फ्रेंडली संबंधों की इच्छा व्यक्त की है।
“बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को रोकें”
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बताया कि उन्होंने इस्कॉन की कोलकाता इकाई के प्रमुख से बात की है और उनके प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है।इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद (VHP), हिंदू जागरण मंच जैसे हिंदू संगठन भी लगातार बांग्लादेश में हो रहे हिंदू हमलों पर आक्रोश में है और देश भर में इन्हें रोके जाने के लिए अपने आंदोलन को दिन प्रतिदिन तेज करने में लगे हुई हैं। भारत भर में अलग-अलग स्थान पर सड़कों पर लोग निकल रहे हैं, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दे रहे हैं और भारत सरकार से आवाहन कर रहे हैं कि वह आगे आए और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को रोके।





