नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से जहां पहले ही मिडिल ईस्ट में उथल-पुथल मची है, वहीं अब इजरायल के हमले के बाद इससे पंजाब से बासमती चावलों के एक्सपोटर्स की रातों की नींद उड़ गई है। दरअसल, ईरान सहित मिडिल ईस्ट के कई ऐसे देश हैं, जहां भारत से बड़े पैमाने पर बासमती चावल मंगाए जाते है। इस समय बासमती चावल ले जाने वाले कई जहाज बीच रास्ते में हैं, और अगर दोनों देशों के बीच युद्ध चलता है तो जहाजों को बीच रास्ते से वापस आना पड़ सकता है ऐसे में भारत को करोड़ों रुपयों का नुकसान हो सकता है।
बता दें, अमेरिका के ईरान पर प्रतिबंध लगाने के चलते जहां पहले से ही भारत से ईरान के लिए बासमती चावलों का एक्सपोर्ट कम हुआ है वही अब इजरायल के हमले के बाद मुश्किलें और बढ़ सकती है। पंजाब बासमती एक्सपोर्टर्स के एसोसिएशन के अशोक सेठी ने एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए बताया कि, बासमती चावलों की कई खेपों के साथ हमारे कई जहाज पहले से ही बीच रास्ते है, ऐसे में तनाव बढ़ने की स्थिति में ये सही जगह तक नहीं पहुंच पाएंगे। इस लड़ाई को झेलना हमारे बस की बात नहीं इससे हमें लाखों का नुकसान हो सकता है।
ईरान से लेकर सऊदी तक भारत से जाता है बासमती चावल
गौरतलब है कि, मिडिल ईस्ट भारत से बासमती चावलों का बड़ा खरीदार है, जिसमें देश के कुल बासमती उत्पादन का 40 परसेंट पंजाब में होता है। शुक्रवार को जहां इजरायल ने ईरान के कई न्यूक्लियर और मिलिट्री सेंटरों पर मिसाइल हमले किए। वही ईरान ने भी पलटवार करते हुए इजरायल पर ड्रोन से हमले किए। जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने देश पर हमले के लिए इजरायल अंजाम भुगतने ‘की चेतावनी दे डाली।
बीमा कराने में भी आ रही परेशानी
अशोक सेठी ने ये भी बताते हुए कहा, कि एक्सपोर्ट किए जाने वाले सामानों का बीमा भी कराने में मुश्किलें आ रही हैं, क्योंकि तनाव का माहौल है इसलिए बीमा कंपनियां भी कवरेज देने से मना कर रही बात सिर्फ बासमती चावल तक सीमित नहीं है । युद्ध बढ़ने की स्थिति में तेल के आयात में भी परेशानी आ सकती है। जिससे भारत को बड़ा नुकसान होगा।
बासमती चावल एक्सपोर्ट पर संकट
अथॉरिटी के मुताबिक, 2022 में बासमती चावल के निर्यात से भारत की विदेशी मुद्रा आय 48,000 करोड़ रुपये थी, जिसमें से पंजाब का योगदान 40 परसेंट था। यहा अमेरिका के ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने से भारत से ईरान के लिए बासमती चावलों का एक्सपोर्ट पहले से ही प्रभावित था क्योंकि ईरान भारत को सही से भुगतान नहीं कर पा रहा था। जिसके चलते भारत ने ईरान से तेल का आयात बंद कर दिया है। इससे रुपये में भारत को भुगतान करने के लिए ईरान के पास भंडार नहीं है। इधर, ईरानी मुद्रा रियाल में गिरावट के चलते भी आयात महंगा हुआ है। वहीं वाणिज्य मंत्रालय के जारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में भारत के कुल बासमती चावल निर्यात 3.54 बिलियन डॉलरमें ईरान की हिस्सेदारी करीब 23 परसेंट थी। जो वित्त वर्ष 2025 तक घटकर 12 प्रतिशत रह गई है।





