नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पोप फ्रांसिस, जिनका असली नाम जोर्ज मारियो बेर्गोलियो था, का सोमवार, 21 अप्रैल 2025 को वेटिकन सिटी के कासा सांता मार्ता में निधन हो गया। वे 88 वर्ष के थे और लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, जिनमें डबल निमोनिया प्रमुख था। 2013 में पोप बनने के बाद, पोप फ्रांसिस ने पारंपरिक पोपल महलों के बजाय कासा सांता मार्ता में रहना चुना, जो उनकी सादगी और विनम्रता का प्रतीक था। उन्होंने वंचितों के लिए आवाज उठाई और सामाजिक न्याय के लिए काम किया।
सुधारों और विवादों से भरा कार्यकाल
पोप फ्रांसिस ने कैथोलिक चर्च में कई सुधार किए, जैसे कि समलैंगिक जोड़ों के लिए सिविल यूनियन का समर्थन, जलवायु परिवर्तन पर चिंता, और मृत्युदंड के खिलाफ सख्त रुख। हालांकि, उनके कुछ विचारों ने पारंपरिक विचारधारा वाले लोगों के बीच विवाद भी उत्पन्न किया। पोप फ्रांसिस ने अपने जीवन में कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना किया, जिनमें युवावस्था में फेफड़े की सर्जरी और 2021 में बड़ी आंत की सर्जरी शामिल हैं। उनके अंतिम अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि 38 दिनों की थी, जो उनके 12 वर्षीय पोप कार्यकाल की सबसे लंबी थी।
अंतिम संस्कार और श्रद्धांजलि
पोप फ्रांसिस के निधन की घोषणा कार्डिनल केविन फैरेल ने की। उनकी अंतिम यात्रा की तैयारियां वेटिकन में शुरू हो गई हैं, और दुनिया भर से श्रद्धांजलि संदेश आ रहे हैं। पोप फ्रांसिस की यादगार छवि पोप फ्रांसिस का जीवन और कार्य हमेशा याद किए जाएंगे। उन्होंने न केवल कैथोलिक चर्च को आधुनिकता की ओर अग्रसर किया, बल्कि पूरी दुनिया में सामाजिक न्याय और करुणा का संदेश फैलाया। वेटिकन के कार्डिनल केविन फेरेल ने पोप के निधन की पुष्टि करते हुए कहा, “आज सुबह रोम के बिशप, फ्रांसिस, फादर के घर लौट गए। उन्होंने अपना पूरा जीवन चर्च की सेवा में समर्पित किया। बीमारी के चलते पोप फ्रांसिस इस साल ईस्टर की प्रार्थना में हिस्सा नहीं ले सके थे। उनकी जगह रिटायर्ड कार्डिनल एंजेलो कोमोस्त्री ने प्रार्थना का नेतृत्व किया था। हालांकि, प्रार्थना के बाद पोप फ्रांसिस लॉलिया बालकनी पर दिखाई दिए थे, जहां हजारों लोग उन्हें देखकर भावुक हो उठे थे।
दुनियाभर में शोक की लहर
पोप फ्रांसिस के निधन की खबर से पूरी दुनिया में शोक की लहर फैल गई है। 1.4 अरब कैथलिक समाज समेत विश्व के नेता और आम लोग उन्हें एक सच्चे मार्गदर्शक और मानवता के सिपाही के रूप में याद कर रहे हैं। अब वेटिकन में नए पोप के चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसे ‘कॉन्क्लेव’ कहा जाता है। इसमें कार्डिनल्स मिलकर नए पोप का चयन करेंगे।





