नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने गुरुवार रात हिंसक रूप ले लिया। गिरती मुद्रा से नाराज लोग बीते करीब दो हफ्तों से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन हालात उस वक्त और बिगड़ गए जब निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने जनता से घरों से बाहर निकलकर इस्लामिक शासन के विरोध में खड़े होने की अपील की। उनकी इस पुकार के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और कई शहरों में रैलियां निकाली गईं। हालात को काबू में करने के लिए सरकार ने सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कर दी।
सूत्रों के मुताबिक देश के कम से कम 50 शहरों में प्रदर्शन फैल चुके हैं। बढ़ते विरोध को देखते हुए प्रशासन ने इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद कर दी हैं। प्रदर्शनकारी सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं और खास बात यह है कि कई जगहों पर रेजा पहलवी के समर्थन में भी आवाजें उठ रही हैं, जो अब तक ईरान में सख्त सजा के दायरे में रहा है।
हिंसक झड़पों में 39 लोगों की मौत
अमेरिका की ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, हिंसक झड़पों में अब तक कम से कम 39 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,260 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जनता के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि अगर लोगों की आवाज दबाने की कोशिश हुई तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा।
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Great nation of Iran, the eyes of the world are upon you. Take to the streets and, as a united front, shout your demands. I warn the Islamic Republic, its leader, and the IRGC that the world and @POTUS are closely watching you. Suppression of the people will not go unanswered. https://t.co/keyFFounaX
— Reza Pahlavi (@PahlaviReza) January 8, 2026
ईरान में विरोध प्रदर्शन अचानक हुए उग्र
ईरान में विरोध प्रदर्शनों ने गुरुवार रात अचानक हिंसक रूप ले लिया। बता दें कि 1979 की इस्लामिक क्रांति से पहले शाह मोहम्मद रेजा पहलवी अमेरिका भाग गए थे और उनके बेटे क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी, आज भी अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे हैं।
दरअसल, 28 दिसंबर को तेहरान में दुकानदारों ने डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल के लगातार गिरते मूल्य के विरोध में नारेबाजी शुरू की थी। इसके बाद देश के अन्य हिस्सों में भी विरोध की लहर फैल गई। हालात और बिगड़े जब रेजा पहलवी ने अपने समर्थकों से सड़कों पर उतरकर इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने बयान में कहा था कि दुनिया की नजरें ईरान पर हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस पर ध्यान रख रहे हैं। उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक, उसके नेताओं और रिवॉल्यूशनरी गार्ड को चेतावनी दी कि लोगों पर हो रहे अत्याचार का जवाब जरूर मिलेगा।
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12th day of anti-establishment protests in Iran
The crowd of protesters in Tehran got bigger. Same location as the one quoted here@GeoConfirmed https://t.co/zwOV0BvI4Q pic.twitter.com/oa5c6HNao6
— Ghoncheh Habibiazad | غنچه (@GhonchehAzad) January 8, 2026
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, पहलवी की अपील के कुछ ही घंटों बाद, गुरुवार रात 8 बजे के आसपास बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने ‘तानाशाही मुर्दाबाद’ और ‘इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए। वहीं कुछ लोग शाह के समर्थन में नारे लगाते हुए कहते पाए गए, ‘ये आखिरी लड़ाई है, पहलवी वापस आएंगे।’
इंटरनेट ठप, प्रदर्शन हुआ हिंसक
ईरान में विरोध प्रदर्शन और हिंसा तेज हो गई है, जिसके चलते सरकार ने इंटरनेट सेवाएं और टेलीफोन लाइनें बंद कर दी हैं। इंटरनेट मॉनिटरिंग एजेंसी नेटब्लॉक्स के अनुसार, कई सर्विस प्रोवाइडर्स पूरी तरह ठप हो गए हैं और देश के कई इलाके ऑफलाइन हो गए हैं। वहीं, प्रदर्शन अब और हिंसक हो गए हैं। कम से कम 50 शहरों में लोगों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें जारी हैं।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान के पास एक शहर में पुलिस कर्नल पर चाकू से जानलेवा हमला हुआ। चहारमहल और बख्तियारी प्रांत के लोरदेगान में बंदूकधारियों ने गोली चलाकर दो सुरक्षा कर्मियों की हत्या कर दी और 30 लोग घायल हो गए। खोरासान रजवी प्रांत के डिप्टी गवर्नर ने सरकारी टीवी को बताया कि बुधवार रात तेहरान से लगभग 700 किलोमीटर दूर चेनरान में पुलिस स्टेशन पर हमले में पांच लोग मारे गए।
ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी
ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कड़ा संदेश दिया है। हाल ही में कंजर्वेटिव रेडियो से बातचीत में उन्होंने कहा कि अगर ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करती है, तो अमेरिका उस पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान को स्पष्ट बता दिया है कि दंगों या प्रदर्शनकारियों पर मार-पीट की स्थिति में अमेरिका सक्रिय कदम उठाएगा। इससे पहले पिछले सप्ताह भी उन्होंने चेतावनी दी थी कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा होने पर अमेरिका उनकी मदद के लिए हस्तक्षेप करेगा।
ईरान में प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं ?
ईरान में लंबे समय से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। सबसे हालिया बड़े आंदोलन 2022 में तब हुए थे जब महसा अमीनी की मौत के बाद लोग सड़कों पर उतरे थे। इस बार प्रदर्शन मुख्य रूप से आर्थिक संकट और गिरती करंसी को लेकर हैं। 28 दिसंबर से राजधानी तेहरान में प्रदर्शन शुरू हुए और जल्द ही यह देश के अन्य हिस्सों तक फैल गए। प्रदर्शनकारी ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और इस्लामिक रिपब्लिक सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। उनका कहना है कि देश में आर्थिक तंगी और बेरोज़गारी के पीछे वर्तमान शासन की नीतियां जिम्मेदार हैं। करंसी की स्थिति भी चिंताजनक है।
दुकानदारों का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रियाल की गिरावट इतनी तेज रही कि अब 1 डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख ईरानी रियाल हो गई है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के समय 1 डॉलर, 70 रियाल के बराबर था, जबकि 2015 के परमाणु समझौते के समय यह 32 हजार रियाल था।





