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Friday, April 17, 2026
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बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव की वोटिंग जारी, BNP-जमात में सीधी टक्कर; भारत-पाकिस्तान की भी नजर

बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान जारी है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में यह पहला बड़ा चुनाव है।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव के लिए गुरुवार को मतदान जारी है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में यह पहला बड़ा चुनाव है। देशभर में सुबह से ही मतदाता बड़ी संख्या में पोलिंग बूथ पहुंच रहे हैं। बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है।

कई बड़े नेताओं ने डाला वोट

मतदान के दौरान राजनीतिक दलों के नेता और उम्मीदवार भी पोलिंग बूथ पहुंच रहे हैं। BNP नेता तारिक रहमान के भी जल्द वोट डालने की खबर है। नेशनल सिटिजंस पार्टी (NCP) के संयोजक नाहिद इस्लाम ने सुबह ही मतदान कर जीत का दावा किया। मतदान के बाद कई मतदाताओं ने नई सरकार से भारत-बांग्लादेश संबंध सुधारने की उम्मीद जताई। एक मतदाता अदीबा ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते पहले जैसे मजबूत होने चाहिए।

किस पार्टी से कितने उम्मीदवार मैदान में

इस चुनाव में कुल दो हजार से ज्यादा उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

BNP – 292 उम्मीदवार

जमात-ए-इस्लामी – 225

जातीय पार्टी – 196

इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश – 259

NCP – 32 उम्मीदवार

दो पर्चियों से वोटिंग क्यों?

इस बार मतदाताओं को दो बैलेट पेपर दिए जा रहे हैं। पहला बैलेट उम्मीदवार चुनने के लिए है, जबकि दूसरा ‘जुलाई चार्टर’ पर जनमत के लिए है। इस चार्टर में राष्ट्रपति की शक्तियां बढ़ाने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। बांग्लादेश की जातीय संसद में कुल 350 सदस्य होते हैं, लेकिन चुनाव केवल 300 सीटों पर होता है। बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहती हैं, जिन्हें जनता नहीं बल्कि चुने हुए सांसद पार्टी के अनुपात के आधार पर चुनते हैं। सरकार बनाने के लिए 300 सीटों में से 151 सीटों का बहुमत जरूरी होता है।

भारत-पाकिस्तान से अलग कैसे है सिस्टम?

बांग्लादेश में भारत और पाकिस्तान की तरह राज्य या मुख्यमंत्री नहीं होते। यहां एक ही सदन वाली संसद है और पूरा देश डिवीजन, जिले और उपजिलों में बंटा है, जिनका संचालन केंद्र सरकार के अधिकारी करते हैं। वहीं भारत और पाकिस्तान में द्विसदनीय व्यवस्था और राज्यों की सरकारें होती हैं। मतदाताओं के अंगूठे पर नीली स्याही लगाई जा रही है, जो भारत की उंगली वाली स्याही से अलग है। कई जगह लोग ट्रेन की छत पर बैठकर वोट देने पहुंचे, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

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