नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। नोबेल शांति पुरस्कार 2025 की घोषणा हो गई है, और इस साल का यह प्रतिष्ठित सम्मान वेनेज़ुएला की मानवाधिकार कार्यकर्ता María Corina Machado को दिया गया है। माचाडो को यह पुरस्कार लोकतंत्र, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय की रक्षा में उनके योगदान के लिए दिया गया है।
ट्रंप नहीं जीत पाए नोबेल
काफी चर्चा थी कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस साल नोबेल शांति पुरस्कार मिल सकता है, क्योंकि उन्हें यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में मध्यस्थता के लिए नामांकित किया गया था। लेकिन जूरी ने आखिरकार मारिया कोरिना माचाडो को इस साल का विजेता चुना।
कौन हैं मारिया कोरिना माचाडो?
मारिया माचाडो वेनेज़ुएला की एक जानी-मानी राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने तानाशाही शासन के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज उठाने में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने इंजीनियरिंग और बिजनेस की पढ़ाई की, लेकिन अपना जीवन समाज सेवा को समर्पित कर दिया। 1992 में माचाडो ने Atenea Foundation की स्थापना की, जो काराकास की सड़कों पर रहने वाले गरीब बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए काम करती है। इसके बाद 2002 में उन्होंने Súmate संगठन शुरू किया, जो देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को बढ़ावा देता है और लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ट्रेनिंग देता है।2010 में माचाडो वेनेज़ुएला की नेशनल असेंबली की सदस्य चुनी गईं, लेकिन 2014 में सत्ता द्वारा उन्हें पद से हटा दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और वेंटे वेनेज़ुएला (Vente Venezuela) नामक विपक्षी पार्टी का नेतृत्व किया।
लोकतंत्र की लड़ाई जारी
2017 में उन्होंने Soy Venezuela गठबंधन बनाने में भी मदद की जो देश में लोकतंत्र बहाल करने और राजनीतिक मतभेदों को दूर करने की दिशा में काम करता है। उनके साहस और नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया, और अब नोबेल कमेटी ने भी उनके प्रयासों को विश्व स्तर पर मान्यता दी है। नोबेल कमेटी ने अपने बयान में कहा, “मारिया कोरिना माचाडो ने कठिन परिस्थितियों में भी लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाई। उन्होंने अपने देश में न्याय, समानता और स्वतंत्रता के लिए जो संघर्ष किया, वह पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायक है।




