नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। म्यांमार और थाईलैंड में 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई। इस आपदा में अब तक 1000 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,670 लोग घायल हुए हैं। भूकंप का केंद्र म्यांमार के सगाइंग शहर के उत्तर-पश्चिम में था और यह सतह के बहुत करीब था, जिससे इसकी विनाशकारी क्षमता और बढ़ गई।
भूकंप के झटकों से कांपा पूरा क्षेत्र
भारत, चीन और थाईलैंड तक महसूस हुए झटके पहला भूकंप दोपहर 12:50 बजे आया, जिसकी तीव्रता 7.7 थी। इसके 12 मिनट बाद 6.4 तीव्रता का दूसरा झटका महसूस किया गया। भारत, चीन और थाईलैंड में भी इसका असर देखने को मिला। थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक निर्माणाधीन 30-मंजिला इमारत भूकंप के झटकों से ढह गई। 40 से अधिक मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटनास्थल पर पुलिस और राहत दल रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। गगनचुंबी इमारतों में रहने वाले लोग घबराकर बाहर आ गए और कई जगहों पर अलार्म बजने लगे।
सेना ने दुनिया से मांगी मदद
म्यांमार की सेना ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है। राहत और बचाव कार्य के लिए सिंगापुर रेड क्रॉस ने डेढ़ लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है। इस फंड का इस्तेमाल भोजन, पानी, कंबल, तिरपाल और हाईजीन किट जैसी आवश्यक चीजों के लिए किया जाएगा।
भारतीय यात्रियों की वापसी
भूकंप के बाद थाईलैंड में छुट्टियां मना रहे भारतीय पर्यटक डर के माहौल में भारत लौटने लगे हैं। बैंकॉक से कोलकाता के यात्री रंजन बनर्जी ने बताया कि जब भूकंप आया तो मॉल और ऑफिस खाली करा लिए गए थे। फिलहाल बैंकॉक में स्थिति सामान्य हो रही है, लेकिन लोग अभी भी डरे हुए हैं।
सरकारें अलर्ट पर, राहत कार्य जारी
म्यांमार और थाईलैंड की सरकारें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। कई इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे भारी नुकसान हुआ है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां म्यांमार को राहत देने के लिए आगे आ रही हैं। भूकंप से हुई इस तबाही ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत पड़ सकती है।




