नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर भारतीय समय अनुसार बुधवार अलसुबह 3:30 बजे धरती पर पहुंचेंगे। वो स्पेस स्टेशन से धरती के लिए रवाना हो चुके हैं। सुनीता और बुच ने 286 दिन अंतरिक्ष में बिताए हैं। इतना लंबा समय अंतरिक्ष में बिताने के बाद धरती पर एडजस्ट करना उनके लिए काफी चैलेंजिग होगा। उन्हें कई तरह की शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। खासतौर पर बैलेंस बनाने में, चलने में, विजन लॉस, हड्डियों व मासपेशियों में नुकसान से लेकर हृदय संबंधी जोखिम उठाने पड़ सकते हैं। लंबे समय तक अकेले रहने की वजह से उन्हें साइकोलॉजिकल परेशानी भी हो सकती है।
बेबी फुट जैसा होगा महसूस
अंतरिक्ष से धरती पर लौटने के बाद सुनीता और बुच को चलने में परेशानी आ सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार दोनों को बेबी फुट जैसा महसूस हो सकता है। इसका मतलब है कि इनके पैरों के तलवों की मोटी स्किन लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के कारण नरम हो सकती है या छिल सकती है। दोनों के पैर बच्चों की तरह संवेदनशील हो सकते हैं।
कमजोर हड्डियां व मासपेशियां
एक स्टडी के अनुसार स्पेस में अंतरिक्ष यात्री का बोन मास हर महीने एक प्रतिशत कम हो सकता है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि सुनीता और बुच का बोन मास लगभग 9 प्रतिशत कम हुआ होगा। हड्डियां कमजोर होने के कारण अचानक फ्रैक्चर होने का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।
खड़े होने या चलने में परेशानी
अंतरिक्ष से लौटने के बाद धरती पर बैलेंस बनाने में परेशानी आती है। स्पेस में माइक्रोग्रैविटी में रहने के कारण इस दौरान मांसपेशियां, खासकर पीठ के निचले हिस्से और पैरों की मासपेशियां शक्तिहीन हो जाती हैं। दरअसल इस दौरान इनका इस्तेमाल शरीर के वजन को सहारा देने के लिए नहीं किया गया, इसी वजह से रीढ़, कूल्हे और पैरों की हड्डियों में मिनरल की कमी हो सकती है। धरती पर वापस लौटने पर इनको खड़े होने, चलने या बैलेंस बनाने में परेशानी हो सकती है।
मानसिक व आंखों की परेशानी
9 महीने तक अंतरिक्ष में अकेले रहने की वजह उन्हें मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ सकती है। इससे ऐंग्जायटी, भ्रम और टेंशन महसूस हो सकती है। वहीं दोनों एस्ट्रोनोट ‘स्पेसफ्लाइट एसोसिएटेड न्यूरो-ऑकुलर सिंड्रोम’ नाम की बीमारी से भी जूझ सकते हैं। इस दौरान दिमाग में तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है, जिसकी वजह से विजन लॉस और दिमाग की सूजन हो सकती है।
हृदय संबंधी परेशानी
एक्सपर्ट के अनुसार बहुत ही कम ग्रैविटी में हृदय का आकार अंडाकार से बदलकर गोल गेंद की तरह हो जाता है। जिसके कारण दिल संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं। धरती पर उतरने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों को चक्कर आ सकते हैं और वह बेहोश भी हो सकते हैं। इस परेशानी को ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है।
बोलने में दिक्कत
सुनीता और बुच को ‘वेटलैस टंग’ की परेशानी यानी बोलने में दिक्कत हो सकती है। कनाडाई एस्ट्रोनोट क्रिस हैडफील्ड ने बताया कि साल 2013 में स्पेस स्टेशन से लौटने पर उनको वेटलैस टंग का अनुभव हुआ लैंडिंग के बाद उनको अपने होठों और जीभ का वजन फील हो रहा था।





