नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हरियाणा चुनाव (Haryana Assembly Election) के नतीजो ने सभी को चौंका दिया और BJP को तीसरी बार सत्ता चलाने का मौका दे दिया। हालांकि इन चुनावी नतीजों ने उन सारे एग्जिट पोल्स को ध्वस्त कर दिया जो कांग्रेस की प्रचंड जीत का दावा कर रहे थे। BJP की इस जीत के पीछे केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की रणनीति को बताया जा रहा है। हालांकि अमित शाह को BJP का चाणक्य कहा जाता है लेकिन आज ये टाइटल धर्मेंद्र प्रधान के लिए इस्तेमाल हो रहा है जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर अपनी रणनीति से पार्टी को तीसरी बार सरकार में काबिज करवाया।
हरियाणावासियों के बीच रहकर किया काम
धर्मेंद्र प्रधान को उस समय हरियाणा चुनाव का प्रभारी बनाया गया जब पूरे प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ भारी जन आक्रोश था। 10 साल की एंटी इंकमबेंसी को खत्म करने के लिए धर्मेंद्र प्रधान ने जमीन पर उतर कर काम किया। प्रधान ने प्रभारी पद संभालते ही हरियाणा को अपना घर बना लिया। उन्होंने एक साथ कई मोर्चो पर पार्टी को मजबूत किया। बीजेपी के अंदर कई ऐसे गुट बन गए थे जिन्हें धर्मेंद्र प्रधान ने एक साथ लाने का काम किया जबकि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित कर हर छोटी से छोटी परेशानी का हल किया और सरकार की नीतियों को जन जन तक पहुंचाया। हरियाणा किसानों का केंद्र बिन्दु रहा है और यह किसी से छुपा नही हैं कि किसान किस कद्र सरकार से नाराज थे, किसानों के साथ समन्वय बैठाने का काम भी उन्हीं के जिम्मे था।
रोड शो और बड़ी रैली में नहीं दिखाई दिल्चस्पी
चुनावों का ऐलान होते ही मीडिया में चर्चा चल पड़ी थी कि बीजेपी का सरकार में वापसी करना बेहद मुश्किल हो सकता है। ऐसे में परिस्थितियों को भांपते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और बड़ी रैलियों के मुकाबले छोटी छोटी जनसभाओं को तरजीह दी। बड़ी रैलियों को करने से बेहतर उन्होने जमीनी स्तर से जुड़ी परेशानियों को हल कराया। चुनाव के अंतिन दौर में न तो PM मोदी और न ही किसी अन्य बीजेपी नेता ने रोड शो किया।





