नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। रतन टाटा नहीं रहे। रतन टाटा एक ऐसे बिजनेसमैन थे जिन्हें सभी पसंद करते थे। India’s Most Loved Businessman, उनके लिए यही कहा जाता था। उनके निधन की खबर केवल उनके परिवार या उनके टाटा समूह के लिए लोगों के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए दुखद है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं, मुंबई के NCPA लॉन में सुबह से लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। रतन टाटा एक ऐसे बिजनेसमैन थे जिन्होंने हर भारतीय की जिंदगी को छुआ था और उनकी वजह से टाटा देश के सबसे भरोसेमंद ब्रांड में से एक बना हुआ था। लेकिन रतन टाटा से जुड़ा एक सवाल ऐसा है जो लोग अक्सर उनसे पूछते थे। सवाल ये कि उन्होंने शादी क्यों नहीं की?
रतन टाटा ने दिया था इंटरव्यू
एक्ट्रेस सिमी ग्रेवाल को दिए एक इंटरव्यू में रतन टाटा ने बताया था, ‘काफी कुछ चल रहा था- मैं काम में डूबा हुआ था, कुछेक बार मैं शादी करने के करीब भी पहुंचा पर शादी हो नहीं पाई।’
इस इंटरव्यू में रतन टाटा ने बताया था कि उन्हें चार बार प्यार हुआ और चारों बार वो शादी के करीब पहुंचे थे लेकिन शादी हो नहीं पाई। उन्होंने इस इंटरव्यू में कहा था, ‘कभी-कभी पत्नी या परिवार नहीं होने की वजह से अकेलापन महसूस होता है। कई बार दिल करता है कि काश मेरे पास ये होता। लेकिन कई बार मैं इस बात से खुश होता हूं कि मुझे किसी और के लिए चिंता नहीं करनी पड़ी। कई बार बहुत अकेलापन लगता है।’
सिमी गरेवाल के साथ रिलेशनशिप में थे
ये बात बहुत कम लोगों को पता है कि सिमी गरेवाल और रतन टाटा सालों पहले रिलेशनशिप में थे। सिमी ग्रेवाल ने साल 2011 में इस बात का खुलासा किया था। हालांकि, वो रिश्ता वर्क आउट नहीं हो पाया और दोनों ने दोस्त बने रहने का फैसला किया। रतन टाटा के निधन की खबर के बाद सिमी ग्रेवाल ने ट्वीट किया, ‘वो कह रहे हैं कि आप नहीं रहे। आपके जाने का दुख बहुत भारी है… बहुत मुश्किल है… अलविदा मेरे दोस्त रतन टाटा!’
टाटा ग्रुप को ऊंचाई पर पहुंचाया
रतन टाटा भारत के उन चुनिंदा बिजनेस टायकून्स में से एक थे, जिनकी तूती पूरी दुनिया में बोलती थी। उन्होंने दो दशक तक टाटा ग्रुप की जिम्मेदारी संभाली और अपने दम पर अपने परिवार के बिजनेस को एक अंतरराष्ट्रीय समूह में तब्दील किया। रतन टाटा हमेशा लो प्रोफाइल रहे। अपने 60 साल से ज्यादा के करियर में वो किसी भी तरह की कॉन्ट्रोवर्सी से दूर रहे।
आपको ये जानकर हैरानी होगी कि रतन टाटा ने 25 की उम्र में जब काम करना शुरू किया तो अपने ही परिवार की एक कंपनी में बतौर अप्रेंटिस काम शुरू किया। वो कंपनी के ब्लास्ट फर्नेस में आम कर्मचारियों की तरह काम करते थे। अपने ही परिवार किसी कंपनी में डायरेक्टर बनने से पहले उन्होंने 8 साल तक वहां नौकरी की। वो अपनी कंपनी में काम करने वाले हर वर्ग के लोगों की दिक्कतों को समझना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने हर वो काम किया जिससे उन्हें इसकी बेहतर अंडरस्टैंडिंग मिल सकती थी।
साल 1991 में रतन टाटा ने JRD टाटा से टाटा संस और टाटा ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभाली थी और उसके बाद अपनी मेहनत से उन्होंने टाटा को घर-घर का नाम बना दिया। ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आज के समय में शायद ही कोई घर ऐसा होगा जहां टाटा का कोई सामान नहीं होता हो। टाटा नमक से लेकर टाइटन की घड़ी तक और वोल्टास के एसी से लेकर टाटा की गाड़ियों तक… टाटा देश के हर परिवार का भरोसेमंद ब्रांड है।





