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Tuesday, March 17, 2026
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Vidhu Vinod Chopra’s Birthday: ‘संजू’ से लेकर ‘पीके’ तक, बनाई ऐसी फिल्में जो बन गईं ब्लॉकबस्टर

विधु विनोद चोपड़ा ने सामाजिक संदेश और मनोरंजन का अद्वितीय संगम रचते हुए हिंदी सिनेमा को कई ऐतिहासिक फिल्में दी हैं, जिनमें उनकी फिल्में न केवल हिट रहीं, बल्कि सोच बदलने का माध्यम भी बनीं।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदी सिनेमा के प्रख्यात निर्माता-निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा आज 4 सितंबर को अपना 73वां जन्मदिवस मना रहे हैं। वर्ष 1952 में श्रीनगर में जन्मे विधु ने भारतीय फिल्म जगत को कुछ ऐसी फिल्में दी हैं, जो मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक सोच को भी प्रभावित करती हैं। एक निर्माता के रूप में उनका दृष्टिकोण सदैव स्पष्ट रहा है — सार्थक सिनेमा, उत्कृष्ट प्रस्तुति और गहरी संवेदना।

 मुन्ना भाई एमबीबीएस: हास्य में छिपा था जीवन का पाठ

वर्ष – 2003 कलाकार – संजय दत्त, अरशद वारसी

राजकुमार हिरानी के निर्देशन में बनी इस फिल्म को विधु विनोद चोपड़ा ने निर्मित किया। यह न केवल संजय दत्त के करियर का पुनरुत्थान साबित हुई, बल्कि इसने भारतीय दर्शकों को यह भी दिखाया कि हास्य और भावुकता का संतुलन क्या होता है।

 लगे रहो मुन्ना भाई: गांधीगिरी से देश को किया परिचित

वर्ष – 2006 | बॉक्स ऑफिस संग्रह – 74.88 करोड़ रुपएं

मुन्ना भाई श्रृंखला की दूसरी कड़ी ने ‘गांधीगिरी’ जैसे शब्द को जनमानस का हिस्सा बना दिया। फिल्म की सफलता इस बात का प्रमाण थी कि गंभीर विचारों को भी सरलता से प्रस्तुत किया जा सकता है।

 3 इडियट्स: शिक्षा व्यवस्था पर व्यंग्य, मनोरंजन के साथ संदेश

वर्ष – 2009 भारत में कमाई – 202 करोड़ रुपएं

आमिर खान, माधवन और शरमन जोशी अभिनीत यह फिल्म भारतीय सिनेमा की उन गिनी-चुनी फिल्मों में शामिल है, जो मनोरंजन और मंथन का अद्वितीय संगम हैं। यह फिल्म 200 करोड़ क्लब में प्रवेश करने वाली पहली हिंदी फिल्म बनी।

 पीके: आस्था और सवालों के बीच नई सोच

वर्ष – 2014 भारत में कमाई – 340.80 करोड़ रुपएं वर्ल्डवाइड – 854 करोड़ रुपएं

‘पीके’ वह फिल्म थी जिसने समाज के उन प्रश्नों को उठाया जिन पर अक्सर चुप्पी साध ली जाती है। विधु विनोद चोपड़ा के बैनर तले बनी इस फिल्म ने न केवल आर्थिक स्तर पर कीर्तिमान स्थापित किया, बल्कि दर्शकों को सोचने पर विवश भी किया।

 संजू: जब पर्दे पर जीवंत हुआ एक सितारा

वर्ष – 2018 बॉक्स ऑफिस संग्रह – 342.53 करोड़

करीब 1976 में FTII के दिनों में विधु की सगाई संपादक रेणू सलूजा से हुई, दोनों की शादी 1983 तक चली। रिपोर्ट के अनुसार, तलाक का मुख्य कारण था। रेणू माँ नहीं बनना चाहती थीं। इसके बाद विधु ने 1985 में दूसरी शादी फिल्म निर्माता शबनम सुखदेव से की।यह रिश्ता भी ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया और लगभग 1989 में समाप्त हो गया। इस शादी से उनकी एक बेटी इशा चोपड़ा हैं। 1 जून 1990 को विधु ने फिल्म आलोचक और पत्रकार अनुपमा चोपड़ा से शादी रचाई।इस विवाह से उनके दो बच्चे, बेटी ज़ुनी और बेटा अग्नि हुए। विधु खुद कहते हैं कि जीवन के आरंभिक संघर्षों और विभाजनों ने उन्हें “दर्दनाक लेकिन परिपक्व और संवेदनशील इंसान” बना दिया है। 

विधु विनोद चोपड़ा केवल एक फिल्म निर्माता नहीं हैं, वे उन विरले व्यक्तित्वों में से हैं जिन्होंने सिनेमा को सरोकार से जोड़ा। उनके प्रोडक्शन हाउस से निकली हर फिल्म अपने आप में एक विचार बनकर उभरी है।विधु विनोद चोपड़ा ने अपने करियर में ये साबित किया है कि अगर कंटेंट दमदार हो, तो फिल्में न सिर्फ हिट होती हैं, बल्कि इतिहास बनाती हैं। चाहे वो ‘मुन्ना भाई’ की मासूमियत हो, ‘3 इडियट्स’ की दोस्ती, या ‘पीके’ की सच्चाई, हर फिल्म में एक अलग जादू नजर आता है।

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