नई दिल्ली/रफ्तार । एकता कपूर का फेमस टीवी शो क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ का पहला टीज़र रिलीज़ किया जा चुका है, जिसमें टीवी की प्यारी बहू तुलसी विरानी बहुप्रतीक्षित रीबूट के साथ वापसी कर चुकी है। राजनेता और अभिनेत्री स्मृति ईरानी का गोल्डन ज़री बॉर्डर वाली मैरून साड़ी, माथे पर बड़ी लाल बिंदी और साइड-पार्टेड लो बन में पहला लुक देखं सभी फैंस के मन में उत्सुकता जाहिर कर रहा है लेकिन इन सब के बीच, टेलीविज़न की क्वीन क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ की निर्माता एकता कपूर ने इस शो को लेकर बड़ी बात बताई है।
बता दे, ये शो करीब 25 सालों बाद वापसी करने को लेकर एकता कपूर ने आज एक नोट लिखकर खुलासा किया कि, स्मृति ईरानी उर्फ तुलसी विरानी के शो सास भी कभी बहू थी को वापस क्यों लाया जा रहा है। शुरुवात में एकता कपूर रीबूट के विचार के खिलाफ थीं? लेकिन फिर मन में आया जब ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ का 25वां साल नज़दीक आ रहा था और इसे दोबारा लॉन्च करने का विचार सामने आया, तो मेरी पहली प्रतिक्रिया ‘नहीं’ थी। मैं पुरानी यादों को क्यों झकझोरना चाहूंगी? यह हमेशा अलग रहेगा। साथ ही, टेलीविजन का क्षेत्र भी अब काफी बदल गया है।
कभी 9 शहरों पर निर्भर रहने वाले दर्शक अब अलग-अलग प्लेटफार्मों पर बिखरे हुए टुकड़ों में शोज को देखं रहे है। क्या यह ‘क्योंकि’ की विरासत को हिला देगा। टीआरपी जो पहले और बाद में किसी ने कभी हासिल नहीं की? क्या यह केवल उच्च संख्या एक शो था?फिर हमने एक अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा किए गए शोध से फाइनल डिसीजन लिया, इस शो ने भारतीय घरों में महिलाओं को आवाज दी। 2000 और 2005 के बीच ‘कहानी घर घर की’।
तभी खुद से कुछ अहम सवाल पूछे, क्या हम ‘क्योंकि’ को आज के कहानी कहने के फ़ॉर्मैट से अलग रख सकते हैं एक बार फिर उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सकते है। जिन्हें टेलीविज़न ने कभी बहादुरी से पेश किया था। क्या हम इसे प्रभावशाली कहानियों के बारे में बना सकते हैं, टीआरपी के बारे में नहीं? हम लाखों लोगों तक पहुँचने की शक्ति वापस पा सकते हैं । चिंता और नियंत्रण के बीच संतुलन पर हम उन मुद्दों पर बात कर सकते हैं जिनसे हम खुद आज कतराते हैं?
एकता ने किया खुलासा
एकता ने बताया, टेलीविज़न, का इस्तेमाल एक ऐसी कहानी कहने के लिए करने जो गूंजती हो, और शायद उतनी ही मात्रा में मनोरंजन के साथ शिक्षा भी देती हो? हम उस समय को वापस ला सकते हैं जब एक परिवार खाने की मेज पर बैठकर बातें करता था। आखिरकार जवाब था मैंने कहा, “चलो ऐसा करते हैं! एक ऐसा शो बनाते हैं जो ज़रूरी सवाल उठाने से न डरे, बातचीत को बढ़ावा दे और विज़ुअल नौटंकी के दौर में अलग दिखे। 25 साल पूरे होने का जश्न मनाने के लिए सीमित एपिसोड्स के साथ वापस आ रहा है, जिसका मकसद है लोगों को प्रभावित करना उनके बोर जीवन को मनोरंजन करना, विचारों को टटोलना और सबसे ज़रूरी, प्रेरणा देना।
ढेर सारे मनोरंजन, उत्साह और दिल को छू लेने वाली भावनाओं के साथ क्योंकि सास भी कभी बहू थी” के लिए – इसकी पहचान, एक आवाज़ देना इसके इतिहास और हमारे लिए क्या लेकर आया है, उसके लिए कहानी कहने की ताकत को सलाम, जो पहले हुआ उसे कम करके दिखाने को सलाम और जो आने वाला है उसे सलाम! कहते हुए हम पुरानी यादों से कभी नहीं जीत पाएँगे। लड़ाई जीतने की नहीं है। उस शो के लिए जो सिर्फ़ हमारा नहीं, बल्कि आपका भी हैयह प्रभाव की है!




