नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में होने वाली विश्वविख्यात लव-कुश रामलीला इस बार फिर चर्चा में है इसकी वजह बनी है बॉलीवुड की एक्ट्रेस पूनम पांडे, जिन्हें इस साल रावण की पत्नी ‘मंदोदरी’ की भूमिका निभाने के लिए चुना गया है। इस घोषणा के साथ ही विवाद की चिंगारी भड़क उठी सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक संगठनों तक में विरोध की लहर दौड़ गई। जिसमें विश्व हिंदू परिषद धार्मिक संगठन ने इस फैसले को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि पूनम की छवि इस पवित्र मंच के अनुकूल नहीं है।
मंदोदरी एक देवीतुल्य किरदार इसे निभाना सौभाग्य की बात – पूनम
इन विवादों के बीच खुद पूनम पांडे सामने आईं और उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया एक वीडियो के ज़रिए दी। उन्होंने कहा,लाल किले में होने वाली लव-कुश रामलीला में मंदोदरी का किरदार निभाना मेरे लिए गर्व की बात है। मैं बहुत खुश हूं और इसे निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं।
नवरात्रि के पूरे नौ दिन वो व्रत रखेंगी
पूनम ने कहा कि वो केवल अभिनय नहीं, बल्कि आस्था के साथ यह किरदार निभा रही हैं। उन्होंने ऐलान किया कि नवरात्रि के पूरे नौ दिन वो व्रत रखेंगी ताकि उनका मन और तन शुद्ध रहे। पूनम ने कहा, मैं चाहती हूं कि जब मैं मंच पर उतरूं, तो हर दर्शक को लगे कि सच में मंदोदरी आ गई हैं। मुझे विश्वास है कि मेरी आस्था को लोग समझेंगे।जय श्री राम – पूनम पांडे
विवाद क्यों?
VHP ने कुछ पुराने विवादों का हवाला देते हुए कहा, इस विरोध की जड़ पूनम पांडे की पूर्व छवि को लेकर चिंता है। जिसमें उन्होनें साल 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने पर कपड़े उतारने का ऐलान किया था। इसके बाद साल 2024 में अपनी मौत की झूठी खबर फैलाकर सुर्खियां बटोरी थीं। ऐसे में विश्व हिंदू परिषद (VHP) का कहना है कि, रामायण जैसे धार्मिक पवित्र मंचन में केवल अभिनय ही नहीं, बल्कि नैतिक छवि भी मायने रखती है। इन घटनाओं के चलते संगठन को डर है कि, रामायण जैसे पावन ग्रंथ पर आधारित मंचन की पवित्रता को ठेस पहुंच सकती है। इसलिए विश्व हिंदू परिषद संगठन ने लव-कुश रामलीला समिति से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।
रामलीला का जलवा इस बार भी बरकरार
बहरहाल, विवादों के बीच भी इस साल की रामलीला में सितारों की भरमार रहेगी, जिसमें एक्टर आर्य बब्बर निभाएंगे रावण का किरदार तो किंशुक वैद्य बनेंगे राम वहीं रिनी आर्य को मिला है सीता का किरदार और भाजपा सांसद मनोज तिवारी परशुराम के अवतार में दिखाएं जाऐगें बता दे, 22 सितंबर से शुरू हो रही रामलीला को लाल किले के ऐतिहासिक मंच से प्रसारित किया जाऐगा जिससे लाखों दर्शकों भी इसे देखं सकेगें।
यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त
गौरतलब है कि, यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त इस रामलीला को देश-विदेश में सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देखा जाता है, और यह हर साल भव्यता के साथ आयोजित होती है।लव-कुश रामलीला केवल मंचन नहीं, भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। ऐसे मंच पर किरदारों का चयन सिर्फ लोकप्रियता नहीं, परंपरा और श्रद्धा को ध्यान में रखकर होना चाहिए, ऐसा मानना है कई सामाजिक संगठनों का।





