नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा श्रीदेवी भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी यादें उनके फैंस के दिलों में आज भी जिंदा हैं। सोमवार की शाम फिल्म ‘होमबाउंड’ की स्पेशल स्क्रीनिंग के मौके पर जाह्नवी ने अपनी मां की यादें एक बार फिर ताजा करा दी। उन्होंने उस नेवी ब्लू साड़ी को पहनकर सबका दिल जीत लिया, जिसे श्रीदेवी ने कभी विराट कोहली और अनुष्का शर्मा की शादी के रिसेप्शन में पहना था। स्क्रीनिंग में जाह्नवी कपूर का ये भावुक और एलिगेंट लुक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
जाह्नवी कपूर का एलिगेंट लुक फैंस को आया पसंद
जाह्नवी कपूर ने ‘होमबाउंड’ की स्क्रीनिंग पर अपने लुक से सभी का ध्यान खींच लिया। सुनहरे बॉर्डर वाली इस नेवी ब्लू साड़ी को उन्होंने ब्लैक वेलवेट ब्लाउज के साथ पेयर किया, जिससे उनका रॉयल एलिगेंस और भी निखरकर सामने आया। जाह्नवी ने अपने लुक को स्टेटमेंट झुमकों, चोकर स्टाइल नेकलेस और एक स्लीक बन के साथ पूरा किया। ये हर एंगल से एक क्लासिक और ग्रेसफुल स्टाइल स्टेटमेंट बन गया। इस खास पल को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर भी शेयर किया, जहां फैंस ने उनकी खूबसूरती और इस अंदाज की जमकर तारीफ की।
‘होमबाउंड’ को मिला ऑस्कर 2026 का टिकट
फिल्म ‘होमबाउंड’ ने भारतीय सिनेमा के लिए गर्व का पल रच दिया है। फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने इसे 98वें अकादमी अवार्ड्स यानी ऑस्कर 2026 के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में चयनित किया है। इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद सोमवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जहां फिल्म के निर्देशक नीरज घायवान और अभिनेता ईशान ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की और अपनी टीम की मेहनत को इसका श्रेय दिया। यह फिल्म अब दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म अवॉर्ड्स में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी।
ईशान ने जताया फिल्म पर गर्व
एक्टर ईशान ने ‘होमबाउंड’ को अपने करियर की सबसे गर्वपूर्ण फिल्म बताया। उन्होंने कहा कि ये वो फिल्म है जिस पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। नीरज भाई ने इसे बहुत सोच-समझकर बनाया है ताकि ये ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। ‘होमबाउंड’ पहले ही 2025 के कान्स फिल्म फेस्टिवल, टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) और इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न (IFFM) में स्क्रीन की जा चुकी है। अब यह फिल्म 26 सितंबर को भारत के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।
क्या है ‘होमबाउंड’ की कहानी?
‘होमबाउंड’ उत्तर भारत के एक छोटे से गांव की पृष्ठभूमि पर आधारित एक संवेदनशील कहानी है, जो दो बचपन के दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों दोस्त पुलिस की नौकरी पाने की कोशिश में हैं। एक ऐसी नौकरी जो उन्हें वह सम्मान और पहचान दिला सकती है, जिसकी उन्हें वर्षों से तलाश है। लेकिन जैसे-जैसे वे अपने लक्ष्य के करीब पहुंचते हैं, सामाजिक दबाव, जिम्मेदारियां और हालात उनकी दोस्ती को कठिन मोड़ पर ला खड़ा करती हैं।




