नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड में कई कलाकार होते हैं जिन्होंने कठिनाइयों को पार कर अपने दम पर सफलता की बुलंदियों को छुआ है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है मशहूर सिंगर शान की, जिन्होंने 13 साल की उम्र में पिता को खो दिया, लेकिन हार नहीं मानी। 17 साल की कम उम्र में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कर बॉलीवुड संगीत जगत में अपनी खास पहचान बनाई। आपको बता दें कि, आज 30 सितंबर को शान अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर हम उनके जीवन के संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में जानते हैं।
क्या है शान का असली नाम?
मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्में शान का असली नाम है शांतनु मुखर्जी। जो लोग उन्हें सिर्फ उनके स्टेज नेम से जानते हैं, उनके लिए ये एक दिलचस्प जानकारी हो सकती है। शान का ताल्लुक एक संगीत प्रेमी परिवार से है। उनके दादा जहर मुखर्जी खुद एक नामचीन गायक थे, और शायद यही वजह रही कि शान के सुर बचपन से ही सधे हुए थे। जिनसे शान को प्रेरणा मिली। 1989 में फिल्म ‘परिंदा’ के लिए गाया उनका पहला गीत ही उनकी किस्मत का ताला खोलने वाला साबित हुआ।
शान ने कई सुपरहिट फिल्मों में अपनी आवाज़ दी
शान ने आर.डी. बर्मन के क्लासिक गाने ‘रूप तेरा मस्ताना’ की रीमिक्स वर्जन को अपनी आवाज दी, जिसने उन्हें नई ऊँचाईयों तक पहुंचाया। इसके बाद उन्होंने ‘साथिया’, ‘लगान’, ‘लक्ष्य’, ‘हम तुम’, ‘भूल भुलैया’, ‘फना’, और ‘ओम शांति ओम’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में अपनी आवाज़ से चार चाँद लगा दिए।
गाने की फैन फॉलोइंग भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जबरदस्त है
सिंगिंग के अलावा शान ने कई टीवी रियलिटी शो जैसे ‘सारेगामापा लिटिल चैंप्स’, ‘सारेगामापा’, ‘म्यूजिक का महा मुकाबला’, और ‘स्टार वॉयस ऑफ इंडिया’ में जज की भूमिका निभाई, जहां उन्होंने नई प्रतिभाओं को निखारने का काम किया। शान ने हिंदी के अलावा बंगाली, उर्दू, तेलुगु, मराठी, और कन्नड़ भाषाओं में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। आज वे बॉलीवुड के टॉप सिंगर्स में गिने जाते हैं और उनकी गाने की फैन फॉलोइंग भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी जबरदस्त है।





