नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बॉलीवुड सुपर स्टार आमिर खान की फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। फिल्म को काफी लोग पसंद कर रहे है। इस फिल्म में कई सीन ऐसे है जो आपको भावुक भी करेंगे और मनोरंजन भी। इसी के साथ हम बात करेंगे जहां बॉलीवुड की छह फ़िल्में ऐसी हैं जिन्होंने दर्शकों के दिल को छुआ, फैंस को इमोशलन किया है। लेकिन साथ ही उन महत्वपूर्ण अस्वस्थता को और विकलांगताओं को भी संदर्भित किया है। जो कई समाज में एक गलत संदेश और उसे गलत समझा गया था। आज में ऐसे छह फिल्मों के बारे में बात करेंगें जो समाज को आइना दिखाती है।
1.तारे ज़मीन पर (2007)
आमिर खान ने ‘सितारे ज़मीन पर’ के साथ शानदार कमबैक किया जो ‘तारे ज़मीन पर’ 2027 का सीक्वल है। 2007 की पारिवारिक ड्रामा ने एक तरह की नई क्रांति ला दी। फिल्म ने इससे साफ संदेश दिया है कि, ‘हर बच्चा खास है’। इस फिल्म में, दर्शील सफारी डिस्लेक्सिया से जूझते हुए बच्चों के बारे में दिखाया गया है। और कैसे वह अपने शिक्षक राम शंकर निकुंभ (आमिर) के मार्गदर्शन से अपनी योग्यता साबित करते हैं।
2.ब्लैक (2005)
2005 की बात है जब संजय लीला भंसाली ने फ़िल्म देखने वालों को चौंका दिया जब उन्होंने अपने भव्य सेट, संगीतमय रोमांटिक ड्रामा को छोड़ दिया और ‘ब्लैक’ लेकर आए। यह फिल्म एक बधिर-अंधी महिला मिशेल (रानी मुखर्जी) और उसके शिक्षक देबराज (अमिताभ बच्चन) के साथ संबंधों की कहानी बयां करती है, जिसे बाद में अल्जाइमर रोग हो जाता है।
3.पा (2009)
निर्देशक आर बाल्की ने पिता-पुत्र अमिताभ बच्चन-अभिषेक बच्चन दोनों के साथ एक शानदार फिल्म पा बनाई, इस फिल्म में पिता पुत्र बन जाता है और पुत्र पिता बन जाता है। इस कॉमेडी ड्रामा ने प्रोजेरिया की दुर्लभ स्थिति को भी उजागर किया।
4.कोई मिल गया (2003)
ऋतिक रोशन और उनके पिता राकेश रोशन ने ‘कोई मिल गया’ 2003 में एक शानदार फिल्म लेकर आए। ऋतिक रोशन और उनके पिता राकेश रोशन के साथ मिलकर एक क्लासिक साइंस-फिक्शन एंटरटेनर बनाया, जो मिलेनियल्स की यादों में बसा हुआ है। अलौकिक जादू के अलावा, फिल्म ने चिकित्सा स्थिति, मस्तिष्क क्षति को उजागर किया।
5. माई नेम इज़ खान (2010)
निर्देशक करण जौहर द्वारा निर्देशित की गई यह फ़िल्म एक मानवीय ड्रामा है, जो एक ऑटिस्टिक मुस्लिम रिजवान खान (शाहरुख खान) की जीवन यात्रा पर आधारित है। जो अपने पालक बच्चे की मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने के लिए मीलों की यात्रा करता है।
6. बर्फी! (2012)
कौन कहता है कि विकलांगता पर आधारित फ़िल्में एक ही समय में हास्यपूर्ण और मनोरंजक नहीं हो सकतीं? अनुराग बसु की बर्फी इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जहाँ एक बहरा और गूंगा मर्फी उर्फ बर्फी (रणबीर) अपनी हरकतों से दर्शकों को बांधे रखता है। और ऑटिस्टिक झिलमिल (प्रियंका चोपड़ा) आपको भावुक कर देगी। यकीनन, बर्फी! प्रियंका चोपड़ा की सर्वश्रेष्ठ ऑन-स्क्रीन परफॉरमेंस है, जिसे ज़्यादा सराहा नहीं गया।




