नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के सबसे बहुमुखी और प्रतिभाशाली अभिनेताओं में गिने जाने वाले बोमन ईरानी का आज (2 दिसंबर) जन्मदिन है। ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस.’ में डॉ. जे.सी. अस्थाना और ‘थ्री इडियट्स’ में प्रोफेसर वीरू सहस्त्रबुद्धे (‘वायरस’) जैसे आइकॉनिक किरदारों को जीवंत करने वाले बोमन का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। यह कहानी है अथाह संघर्ष, अटूट जुनून और इस बात के प्रमाण की कि सफलता के लिए उम्र कोई बाधा नहीं होती।
जन्म से पहले पिता का साया उठा, मां ने अकेले पाला
बोमन ईरानी का जन्म 2 दिसंबर 1959 को एक पारसी परिवार में हुआ था। उनकी जिंदगी में संघर्ष की शुरुआत जन्म से पहले ही हो गई थी। दुर्भाग्यवश, बोमन के जन्म से छह महीने पहले ही उनके पिता का निधन हो गया था।उनकी मां ने अकेले ही तीन बड़ी बेटियों और नवजात बोमन को पालने की जिम्मेदारी उठाई। घर चलाने के लिए उनकी मां घर में चिप्स बनाती थीं और एक छोटी बेकरी शॉप चलाती थीं। इसी दुकान की आय से पूरे परिवार का खर्च चलता था।बोमन बचपन में पढ़ाई में बहुत अच्छे नहीं थे। वह हमेशा मानते थे कि उन्हें ऐसा पेशा चुनना है जहाँ मार्क्स की नहीं, बल्कि रचनात्मकता और हुनर की अहमियत हो।
वेटर से बेकरी के मालिक तक का सफर
परिवार को आर्थिक मजबूती देने के लिए बोमन ने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया।17 साल की उम्र में उन्होंने वेटर का कोर्स किया और एक होटल में रूम सर्विस वेटर के रूप में काम किया।लगभग दो साल वेटर की नौकरी करने के बाद, मां की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी और बेकरी शॉप की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी।
बोमन ने पूरे 12 साल तक यह बेकरी चलाई। इसी अवधि में उनकी शादी हुई और उन्होंने बेकरी की आय से ही अपने परिवार का पालन-पोषण किया। उनकी पत्नी का नाम ज़ेनोबिया ईरानी और इस कपल के दो बेटे हैं। जिनमें बोमन के बड़े बेटे दानिश भी फिल्म और एक लेखक और निर्देशक के रूप में सक्रिय हैं। और छोटे बेटे कयोज़ ईरानी एक अभिनेता हैं। उन्होंने करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ द ईयर’ (2012) में ‘सॉटी’ का किरदार निभाकर बॉलीवुड में डेब्यू किया था।बोमन ईरानी अपने परिवार को अपनी सफलता का एक बड़ा सहारा मानते हैं और अक्सर सोशल मीडिया पर उनके साथ तस्वीरें साझा करते रहते हैं।
पैशन नहीं छोड़ा: फोटोग्राफी और थिएटर का जुनून
बेकरी शॉप के व्यस्त शेड्यूल के बावजूद बोमन ने अपनी रचनात्मकता को जिंदा रखा।वह फोटोग्राफी के क्षेत्र में सक्रिय रहे और इतने माहिर हुए कि वर्ल्ड बॉक्सिंग इवेंट जैसी बड़ी स्पर्धाओं की फोटोग्राफी भी की।साथ ही, वह थिएटर से भी जुड़े रहे। उनके किए गए प्ले खूब हिट हुए, और 35 साल की उम्र तक बोमन थिएटर की दुनिया में एक जाना-पहचाना नाम बन चुके थे। यही रंगमंच उनके लिए बॉलीवुड का रास्ता बना।
42 की उम्र में बॉलीवुड डेब्यू और विधु विनोद चोपड़ा का विश्वास
बोमन ईरानी की जिंदगी में निर्णायक मोड़ तब आया जब फिल्ममेकर विधु विनोद चोपड़ा ने उनका नाटक देखा।प्ले से प्रभावित होकर चोपड़ा ने बोमन को ऑफिस बुलाया और सीधे 2 लाख रुपये का चेक एडवांस में दे दिया। चोपड़ा ने भविष्यवाणी की थी कि एक दिन बोमन इतने व्यस्त होंगे कि उन्हें उनसे डेट मांगनी पड़ेगी।
करोड़ों युवाओं के लिए एक सच्चे प्रेरणा स्रोत हैं।
(2003) में बोमन ने 42 साल की उम्र में चोपड़ा की फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई और डॉ. जे.सी. अस्थाना के रूप में उनका किरदार अमर हो गया।
इसके बाद उन्होंने थ्री इडियट्स, डॉन, ‘खोसला का घोंसला’ जैसी ढेरों फिल्में कीं। हाल ही में उन्होंने वेब सीरीज ‘मासूम’ के जरिए ओटीटी डेब्यू भी किया है।बोमन ईरानी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि कड़ी मेहनत, जुनून और प्रतिभा के बल पर किसी भी उम्र में सफलता हासिल की जा सकती है। वह आज करोड़ों युवाओं के लिए एक सच्चे प्रेरणा स्रोत हैं।





