नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साल 2025 में मौद्रिक नीति के तहत रेपो रेट में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। साल की शुरुआत में जनवरी 2025 में रेपो रेट 6.50 प्रतिशत था, जो अब घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया है। आरबीआई ने फरवरी और अप्रैल में 0.25-0.25 प्रतिशत, जून में 0.50 प्रतिशत और दिसंबर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की। इसका सीधा फायदा होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और एजुकेशन लोन लेने वालों को मिला है। ब्याज दरें कम होने से न केवल कुल देनदारी घटी है, बल्कि मासिक ईएमआई भी पहले के मुकाबले कम हुई है।
2026 में और कटौती की कितनी उम्मीद
Axis MaxLife Insurance के अनुसार, 2026 में महंगाई दर RBI के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के आसपास या उससे नीचे रह सकती है। ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंक के पास ग्रोथ को सपोर्ट करने वाली पॉलिसी जारी रखने की गुंजाइश बनी रहेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि दिसंबर 2025 में नरम रुख अपनाने के बाद RBI फरवरी या अप्रैल 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती कर सकता है। इससे लोन की ब्याज दरों में और कमी आने की संभावना है।
लिक्विडिटी सपोर्ट से मिलेगी अतिरिक्त राहत
Axis MaxLife Insurance का कहना है कि RBI ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के जरिए पूरे 2026 में सिस्टम में लिक्विडिटी बनाए रख सकता है। कम पॉलिसी रेट और पर्याप्त नकदी की उपलब्धता का यह कॉम्बिनेशन पर्सनल और कॉर्पोरेट दोनों तरह के कर्जदारों के लिए उधार लेने की लागत को और कम करेगा। इसका असर बैंकिंग सिस्टम पर भी सकारात्मक रहेगा और क्रेडिट ग्रोथ को मजबूती मिलेगी।
रियल एस्टेट सेक्टर को कितना फायदा
रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े एक्सपर्ट्स भी ब्याज दरों में नरमी को सकारात्मक मान रहे हैं। काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी के मुताबिक, 2026 रियल एस्टेट के लिए अहम साल साबित हो सकता है। सस्ते होम लोन से खरीदारों का भरोसा बढ़ा है। वहीं, सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का का कहना है कि प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद कम ईएमआई और स्थिर लोन रेट्स ने खरीदारों की दिलचस्पी बनाए रखी है।





