नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अगर आप नौकरी करते हैं, तो हर महीने आपकी सैलरी का एक हिस्सा आपके भविष्य के लिए EPF अकाउंट में जमा होता है। इतना ही पैसा आपकी कंपनी भी डालती है। इस जमा पर सरकार फिलहाल 0.25% का शानदार ब्याज दे रही है, जो कई सरकारी स्कीम्स से भी ज़्यादा है। इस ब्याज के साथ लंबे समय में आपके लिए बड़ा फंड तैयार हो सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि, आप इस तगड़े ब्याज का और भी ज़्यादा फायदा आप उठा सकते हैं। आज हम आपको वो तरीका बता रहे हैं जिससे आप अपने इपीएफ पर मिलनेवाले ब्याज को सही मायनों में वसूल कर सकते हैं।
ये ‘सीक्रेट’ तरीका है क्या?
वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड जैसा कि नाम से ही साफ है, ये आपकी इच्छा पर निर्भर करता है। ये ईपीएफ का ही एक्सटेंशन है, जिसमें आप अपनी मर्ज़ी से अपने ईपीएफ अकाउंट में ज़्यादा पैसा जमा कर सकते हैं, जिसमें आप अपनी मर्ज़ी से अपने ईपीएफ अकाउंट में ज़्यादा पैसा जमा कर सकते हैं। सबसे अच्छी बात ये है कि, वीईपीएफ पर भी आपको उतना ही ब्याज यानी 8.25% मिलता है, जितना ये एक तरह से अपनी बचत को बूस्ट करने का ज़बरदस्त ज़रिया है।
VPF में कितना पैसा डाल सकते हैं?
नियम के मुताबिक, एक कर्मचारी चाहे तो अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते डीए का 100% तक VPF में जमा करवा सकता है। जबकि EPF में आपका योगदान सिर्फ 12% तक सीमित होता है। मतलब, अगर आप ज़्यादा बचत करना चाहते हैं और कहीं और निवेश का जोखिम नहीं लेना चाहते।
कैसे करें VPF में निवेश शुरू?
ये प्रोसेस बेहद आसान है, आपको बस अपनी कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट से संपर्क करना है, उन्हें बताएं कि आप वीपीएफ के ज़रिए अपना पीएफ योगदान बढ़ाना चाहते हैं, एचआर आपको एक फॉर्म देगा, जिसमें आपको बताना होगा कि, आप अपनी सैलरी का कितना अतिरिक्त हिस्सा वीपीएफ में कटवाना चाहते हैं, फॉर्म जमा करने के बाद, आपकी कंपनी आपके ईपीएफ अकाउंट के साथ ही वीपीएफ की प्रक्रिया पूरी कर देगी और अगले महीने से आपकी सैलरी से तय रकम कटनी शुरू हो जाएगी।
पैसा निकालने के क्या हैं नियम?
वीपीएफ के नियम बिल्कुल EPF की तरह ही है, आप अपने वीपीएफ की पूरी रकम रिटायरमेंट के बाद ही निकाल सकते है, पांच साल का लॉक-इन पीरियड पूरा होने के बाद, आप ज़रूरत पड़ने पर कुछ पैसा निकाल सकते है। जैसे कि, बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर घर बनाने के लिए अगर आप नौकरी बदलते हैं तो, वीपीएफ अकाउंट भी आपके ईपीएफ अकाउंट के साथ आसानी से नई कंपनी में ट्रांसफर हो जाता है।
टैक्स में भी मिलेगा तगड़ा फायदा
वीपीएफ निवेश का एक शानदार विकल्प इसलिए भी है क्योंकि ये E-E-E कैटेगरी में आता है। इसका मतलब है निवेश पर छूट, ब्याज पर छूट और निकासी पर भी छूट।





