नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। इंडसइंड बैंक के शेयरों में मंगलवार को 25 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 52-सप्ताह के निचले स्तर 674.55 रुपये पर पहुंच गया। बैंक ने हाल ही में अपने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में गड़बड़ी की जानकारी दी थी, जिसका असर उसके शेयरों पर पड़ा है। यह नवंबर 2020 के बाद से बैंक के शेयरों में आई सबसे बड़ी गिरावट है।
फॉरेक्स हेजिंग में गड़बड़ी का खुलासा
इंडसइंड बैंक ने अपनी आंतरिक समीक्षा के बाद पाया कि उसने विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) लेनदेन से जुड़ी हेजिंग लागत को कम करके आंका था। इस गलती के कारण बैंक के पिछले तिमाही के मुनाफे को अधिक दिखाया गया था। इस वित्तीय गड़बड़ी के चलते बैंक के नेटवर्थ पर 1,600-2,000 करोड़ रुपये तक का असर पड़ सकता है, जिससे इसकी नेटवर्थ पर 2.35 प्रतिशत का नेगेटिव प्रभाव पड़ा है।
निवेशकों का भरोसा कम हुआ
इस खुलासे के बाद निवेशकों का बैंक पर भरोसा कम हुआ है, जिससे शेयर की कीमत लगातार गिर रही है। पिछले एक साल में बैंक के शेयरों में पहले ही 42 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। सोमवार को बैंक के शेयर में 4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई थी, जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक के सीईओ के कार्यकाल को तीन साल के बजाय सिर्फ एक साल तक बढ़ाने की मंजूरी दी थी।
बैंकिंग सेक्टर को भी झटका
इंडसइंड बैंक के शेयरों में गिरावट का असर पूरे बैंकिंग सेक्टर पर पड़ा है। निफ्टी बैंक इंडेक्स में 0.7 प्रतिशत और निफ्टी 50 में 0.27 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे बैंकिंग शेयरों में निवेशकों के घटते विश्वास का संकेत मिलता है। बैंक ने इस मामले की विस्तृत जांच के लिए एक बाहरी एजेंसी को नियुक्त किया है। अब फाइनल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। बैंक ने यह भी कहा है कि वह अपने नेटवर्थ पर पड़ने वाले प्रभाव से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस पूरी समीक्षा की शुरुआत भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सितंबर 2023 में डेरिवेटिव पोर्टफोलियो पर जारी नए दिशानिर्देशों के बाद हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय निवेशकों को इंडसइंड बैंक के शेयरों में निवेश करने से पहले सतर्कता बरतनी चाहिए। जब तक बैंक इस मुद्दे को पूरी तरह सुलझाने में सफल नहीं होता, तब तक शेयरों में अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशकों को बैंक की फाइनल रिपोर्ट और भविष्य की रणनीति पर नजर रखनी चाहिए।




