नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आम निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों, विशेषकर ट्रेजरी बिल्स (T-Bills) में निवेश को आसान बनाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद घोषणा की कि अब रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म के जरिये T-Bills में सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) शुरू किया जाएगा।
यह सुविधा म्यूचुअल फंड में चल रही SIP व्यवस्था की तर्ज पर तैयार की गई है, ताकि रिटेल निवेशकों को नियमित, सुरक्षित और आसान निवेश का विकल्प मिल सके। ट्रेजरी बिल्स सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं, इसलिए इन्हें पूरी तरह जोखिम-मुक्त माना जाता है और इनमें नकदी की भी कोई कमी नहीं होती। यही वजह है कि यह विकल्प छोटे निवेशकों के लिए भी बेहद आकर्षक साबित हो सकता है। वित्तीय जानकारों ने इस पहल को घरेलू बॉन्ड बाजार को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है।
क्या है रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म?
रिजर्व बैंक ने नवंबर 2021 में रिटेल डायरेक्ट स्कीम (RDS) के तहत रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। यह प्लेटफॉर्म आम निवेशकों को सीधे RBI के साथ गिल्ट खाता (Gilt Account) खोलने और सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश करने की सुविधा देता है। इस माध्यम से निवेशक प्राथमिक नीलामी (Primary Auction) में भाग ले सकते हैं और द्वितीयक बाजार (Secondary Market) में इन प्रतिभूतियों की खरीद-फरोख्त भी कर सकते हैं। मई 2024 में लॉन्च किए गए रिटेल डायरेक्ट मोबाइल ऐप ने इस प्रक्रिया को और सहज बना दिया है, जिससे अब निवेशक अपने स्मार्टफोन से ही निवेश और खाता प्रबंधन कर सकते हैं। निरंतर तकनीकी अपडेट्स और सुविधाजनक इंटरफेस के चलते यह प्लेटफॉर्म खुदरा निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड्स में निवेश को अधिक सरल और आकर्षक बना रहा है।
क्या होता है ट्रेजरी बिल (T-Bill) ?
ट्रेजरी बिल्स (T-Bills) भारत सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले अल्पकालिक ऋण उपकरण होते हैं, जिनका उद्देश्य सरकार की तात्कालिक नकदी जरूरतों को पूरा करना होता है। ये आमतौर पर 14 दिन, 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन की अवधि में जारी किए जाते हैं । T-Bills पर ब्याज नहीं दिया जाता, बल्कि इन्हें छूट पर बेचा जाता है और परिपक्वता (मैच्योरिटी) पर अंकित मूल्य (Face Value) पर वापस खरीदा जाता है। इस तरह निवेशक को पूंजी वृद्धि (Capital Appreciation) के रूप में रिटर्न मिलता है।
उदाहरण के लिए मान लीजिए, 91 दिन का एक T-Bill जिसकी अंकित मूल्य 130 रुपये है, उसे 128 रुपये में खरीदा गया। परिपक्वता पर निवेशक को 130 रुपये मिलेंगे, यानी 2 रुपये का लाभ। T-Bill में न्यूनतम निवेश 10,000 रुपये से शुरू होता है, और इसके बाद यह निर्धारित मल्टीपल्स में किया जा सकता है।
T-Bills में SIP कैसे करें? जानें पूरी प्रक्रिया और फायदे
अब निवेशक RBI के रिटेल डायरेक्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से T-Bills में भी SIP शुरू कर सकते हैं। इस नई सुविधा के तहत निवेशक साप्ताहिक या मासिक अंतराल पर स्वचालित निवेश की योजना बना सकते हैं। SIP की सेटिंग्स को निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार कभी भी संशोधित या रद्द कर सकते हैं। इस व्यवस्था से हर बार होने वाली नीलामी में मैनुअली बोली लगाने की जरूरत नहीं रहती, जिससे निवेश करना न केवल आसान, बल्कि समय की बचत करने वाला भी हो जाता है।
इसके फायदे
- निवेश की प्रक्रिया होती है ऑटोमैटिक और व्यवस्थित
- मैनुअल ट्रेडिंग या बोली लगाने की जरूरत नहीं
- लंबे समय की बचत और रिटर्न की योजना बनाना होता है आसान
- उदाहरण के तौर पर : अगर कोई निवेशक हर महीने 10,000 रुपये के T-Bills में निवेश करना चाहता है, तो वह SIP सेट कर सकता है। यह राशि हर महीने अगली उपलब्ध नीलामी में स्वतः निवेश हो जाएगी।
T-Bills में SIP से कितना मिलता है फायदा?
RBI का यह प्लेटफॉर्म म्यूचुअल फंड की तरह नियमित निवेश की आदत को बढ़ावा देता है, जिससे खुदरा निवेशकों में सिस्टमैटिक सेविंग की आदत विकसित होती है। चूंकि T-Bills भारत सरकार द्वारा समर्थित होते हैं, इसलिए इन्हें जोखिम-मुक्त निवेश विकल्प माना जाता है। साधारण बचत खातों में जहां 2-3% का सालाना ब्याज मिलता है, वहीं T-Bills आमतौर पर 6-7% वार्षिक रिटर्न दे सकते हैं। हालांकि यह रिटर्न उनकी अवधि और मौजूदा बाजार दरों पर निर्भर करता है। SIP में निवेशक अपने अनुसार ऑटो-बिडिंग नियम को संशोधित या रद्द कर सकते हैं।
रेपो रेट में नहीं हुआ कोई बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की घोषणा के दौरान रेपो रेट को 5.5% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर बैंक नजर रखे हुए है और उसी के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।




