नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बायोपिक पर विवाद गहरा गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट में आज गुरुवार को हुई सुनवाई में यह बताया गया कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने फिल्म ‘अजय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी’ को सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया है।
बता दें कि यह फिल्म योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित एक किताब पर बनाई गई है। फिल्म के निर्माता ने कोर्ट में बताया कि सीबीएफसी के सीईओ ने यह शर्त रखी थी कि पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर एनओसी (No Objection Certificate) प्राप्त किया जाए, उसके बाद ही फिल्म को सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इसके अलावा, बोर्ड के चेयरमैन ने यह भी कहा था कि वे योगी से मिलने की अपॉइंटमेंट दिलवाने में मदद कर सकते हैं।
कोर्ट का CBFC को निर्देश
कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) किसी भी फिल्म के लिए मुख्यमंत्री या किसी भी नेता से एनओसी मांगने का अधिकार नहीं रखता। अगर फिल्म में कोई विवादित सीन, डायलॉग या कंटेंट है, तो CBFC को इसके बारे में स्पष्ट कारण देना होगा। कोर्ट ने CBFC को निर्देश दिया है कि किसी अधिकारी या नेता से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है।
कोर्ट ने CBFC को चेताया
जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस नीला गोकले की बेंच ने कहा, “आप यह स्पष्ट क्यों नहीं करते कि कौन-कौन से सीन या डायलॉग आपत्तिजनक हैं? आप डिस्क्लेमर भी ले सकते हैं। लेकिन आपने नियमों का पालन नहीं किया है।” कोर्ट ने CBFC को आदेश दिया है कि वे 18 अगस्त तक फिल्म निर्माताओं को आपत्तिजनक सीन और डायलॉग्स की सूची दें, ताकि आवश्यक बदलाव किए जा सकें।
स्क्रिप्ट पढ़कर सर्टिफिकेट रिजेक्ट करने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
सीबीएफसी के वकील ने कहा कि फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद ही सर्टिफिकेशन रिजेक्ट किया गया था। इस बात पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और पूछा, “जब आपने 17 जुलाई को कहा था कि नियमों के अनुसार फैसला लिया जाएगा, तो फिल्म देखकर निर्णय क्यों नहीं लिया गया?”
किताब और फिल्म के प्रभाव में अंतर
आज की सुनवाई में सीबीएफसी के सीनियर वकील अभय खंडेपरकर ने बताया कि बोर्ड ने अब फिल्म देख ली है और उसके बाद ही सर्टिफिकेशन रिजेक्ट किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह फिल्म एक बायोपिक है, लेकिन मेकर्स इसे फिक्शनल बताने की कोशिश कर रहे हैं। खंडेपरकर ने बताया कि किताब और फिल्म के प्रभाव में फर्क होता है, इसलिए फैसला बोर्ड के चेयरमैन के विवेक के आधार पर लिया गया है।
13 अगस्त तक अंतिम फैसला जरूरी, कोर्ट ने दिए निर्देश
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि फिल्म निर्माता 8 अगस्त तक रिविजनल कमिटी के पास अपील करें। सीबीएफसी को 11 अगस्त तक फिल्म में आपत्तिजनक कंटेंट की पूरी जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। साथ ही, बोर्ड को 13 अगस्त तक अपना अंतिम फैसला देना अनिवार्य है।





