नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बैंकों में सेविंग अकाउंट खोलना तो आसान है, लेकिन उसे बनाए रखना उतना ही मुश्किल होता जा रहा है। अगर आपके अकाउंट में न्यूनतम बैलेंस नहीं है, तो बैंक आपसे जुर्माना वसूलते हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में देश के 11 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने इस पेनल्टी के जरिए 2,331 करोड़ रुपये वसूल लिए।
सांसद राघव चड्ढा ने उठाए सवाल
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि बैंक बिना जानकारी के ही ग्राहकों से अलग-अलग चार्जेज वसूल रहे हैं। उन्होंने बताया कि मिनिमम बैलेंस पेनल्टी के अलावा बैंक एटीएम यूज फीस, बैंक स्टेटमेंट फीस, इनएक्टिविटी फीस और SMS अलर्ट फीस के नाम पर भी पैसे काट रहे हैं।
कौन सा बैंक कितना पैसा वसूल रहा है?
2023-24 में सबसे ज्यादा जुर्माना पंजाब नेशनल बैंक PNB ने लिया, जिसने अकेले 633.4 करोड़ रुपये वसूले। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा ने 386.51 करोड़ रुपये और इंडियन बैंक ने 369.16 करोड़ रुपये चार्ज किए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन सालों में सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों ने कुल 5,614 करोड़ रुपये सिर्फ मिनिमम बैलेंस न रखने पर वसूले। इन बैंकों में बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया समेत अन्य बैंक शामिल हैं।
RBI के नियम क्या कहते हैं?
भारतीय रिजर्व बैंक RBI के मुताबिक बैंक को खाता खोलते समय ग्राहकों को न्यूनतम बैलेंस की जानकारी देनी होगी। यदि बैंक नियम बदलता है, तो ग्राहक को सूचित करना अनिवार्य है। बैलेंस न रखने पर बैंक को पहले नोटिस देना होगा और एक महीने का समय देना होगा। बैंक सिर्फ जुर्माने की वजह से अकाउंट का बैलेंस निगेटिव नहीं कर सकते। देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक SBI स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 2020 से ही मिनिमम बैलेंस पेनल्टी नहीं ले रहा है।
ग्राहकों के लिए क्या विकल्प हैं?
अगर आप मिनिमम बैलेंस चार्ज से बचना चाहते हैं तो इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं जनधन खाता खोलें इसमें मिनिमम बैलेंस की कोई जरूरत नहीं होती। सैलरी अकाउंट इनमें आमतौर पर कोई न्यूनतम बैलेंस नहीं रखना पड़ता। नॉन-चार्जेबल अकाउंट चुनें कुछ बैंक शून्य बैलेंस सेविंग अकाउंट की सुविधा देते हैं। बैंक सेवाओं के नाम पर हर साल हजारों करोड़ रुपये जुर्माने के रूप में वसूल रहे हैं। यह सवाल उठता है कि क्या यह सही है? सरकार और बैंकों को ग्राहकों की सुविधा के लिए पारदर्शिता लानी होगी, ताकि लोग बिना डर के अपने पैसे बैंक में रख सकें।




