नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । फ्रांस वैसे भारत का कई मामलों में सहयोगी है। लेकिन पिछले 10 साल के मोदी राज में कई बिन्दु हैं जिन पर बहुत काम करने की जरूरत अब भारत सरकार को ध्यान में आई है। इसलिए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, एयरोस्पेस और रक्षा, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहन तथा डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों में फ्रांसीसी व्यवसायों के साथ सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है। यह चर्चा उन्होंने शिया-प्रशांत क्षेत्र के फ्रांसीसी विदेश व्यापार आयुक्तों के वार्षिक सम्मेलन से शुरू की है।
दरअसल यहां बोलते हुए वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फ्रांसीसी सीईओ और व्यापार जगत के नेताओं के बीच कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार मौजूदा अवसरों को देखते हुए कमज़ोर स्तर पर है। जिसे हमें सामूहिक रूप से और अधिक बड़ा, बेहतर और अधिक तेज़ बनाने की आकांक्षा करनी चाहिए। इसके साथ ही गोयल ने प्रकाश डाला कि दोनों ही देश एक-दूसरे के भरोसेमंद साझेदार हैं और इससे निवेश में हमारी निरंतर भागीदारी मजबूत होगी, क्योंकि भारतीय उद्योग फ्रांस जा रहे हैं और फ्रांसीसी विनिर्माण भारत आ रहा है। ऐसे में स्वभाविक तौर पर हमारी सेवाएं एक-दूसरे के साथ मिलकर अधिक प्रभाव डाल रही हैं।
गोयल ने यहां बताया कि वैश्विक क्षमता केंद्र भारत में अपना कारोबार स्थापित करने के लिए आ रहे हैं और भारतीय प्रतिभाओं के आकर्षण का लाभ उठा रहे हैं।” वित्त वर्ष 2023-24 में भारत और फ्रांस के बीच द्विपक्षीय व्यापार 15 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें भारतीय निर्यात लगभग 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर और आयात लगभग 8 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। फ्रांस को भारत का 11वां सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेशक बताते हुए गोयल का कहना यह रहा है कि भविष्य में इसमें काफी संभावनाएं हैं। भारत और फ्रांस इस वर्ष राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।
इसके साथ ही रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र पर विशेष जोर देते हुए गोयल का कहना रहा कि भारत एक बड़ा बाजार है और फ्रांसीसी कंपनियों को अधिक संभावनाएं तलाशनी चाहिए। भारत के पास ऑर्डर पर विमानों की संख्या करीब 1,500 है। हमारे पास विकल्प हैं जिससे उन्हें करीब 2,000 तक ले जाया जा सकता है। और मैं देख सकता हूं कि अगले तीन दशकों में भारतीय विमानन बाजार दुनिया में विमानों की मांग को सबसे ज्यादा बढ़ाने वाला होगा और मुझे लगता है कि फ्रांसीसी कंपनियों के लिए भी यह सबसे अच्छा होगा कि वे भारतीय विनिर्माण संभावनाओं पर गौर करें, विमानों, विमानों के स्पेयर पार्ट्स, MRO आदि के लिए भारत में अपनी बिक्री बढ़ाने पर विचार करें।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल मंत्री यहां इस बात पर भी जोर देते दिखे हैं कि भारत ने 2014 में अपने हवाई अड्डों की संख्या 74 से बढ़ाकर अब करीब 125 कर दी है, जो लगभग दोगुनी है और 2029 तक 75 और हवाई अड्डे जोड़ने की योजना है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। ऐसे में तकनीकी एवं अन्य सभी क्षेत्रों में फ्रांस के उद्योगपतियों का भारत में स्वागत है, उन्हें हर तरह से हर संभव सहयोग भारत सरकार एवं जिस भी राज्य में वे अपना उद्योग लगाएंगे वहां सहयोग दिया जाएगा।




