नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 1 अप्रैल से 17 दिसंबर तक टैक्स कलेक्शन के आंकड़े बेहद दिलचस्प रहे हैं। इस बीच, व्यक्तिगत आयकर (PIT) का संग्रह कॉर्पोरेट आयकर (CIT) की तुलना में अधिक रहा, जो आमतौर पर नहीं देखा जाता है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, व्यक्तिगत आयकर का नेट क्लेक्शन 7,97,080 करोड़ रुपये रहा, जबकि कॉर्पोरेट कर का नेट क्लेकशन 7,42,607 करोड़ रुपये रहा। यह स्थिति आर्थिक रूप से सकारात्मक है, क्योंकि इससे पता चलता है कि देश में व्यक्तिगत आयकर (PIT) का क्लेक्शन बढ़ रहा है, जो सरकारी खजाने में अधिक योगदान दे रहा है। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में व्यक्तिगत आयकर का हिस्सा बढ़ रहा है, जो 2014-15 में 2.11% था और 2021-22 में 2.94% तक पहुंच गया। यह वृद्धि आर्थिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में सरकार ने टैक्सपेयर्स की संख्या बढ़ाने और लोगों को व्यक्तिगत आयकर के बारे में अधिक जागरूक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसका नतीजा यह है कि लोग अब ज्यादा कमाई कर रहे हैं और परिणामस्वरूप टैक्स कलेक्शन में भी उनकी भागीदारी बढ़ी है। इससे आर्थिक स्थिति में सुधार का संकेत मिलता है।
इतिहास में चौथा Highest PIT Collection
वित्त वर्ष 2000 के बाद से यह चौथी बार है कि इंडिविजुअल इनकम टैक्स कलेक्शन कॉर्पोरेट कर से अधिक हो गया है। 2020-21, 2022-23, 2023-24 और 2024-25 में पीआईटी के आंकड़े लगातार CIT से अधिक रहे हैं, जो देश की बेहतर आर्थिक स्थिति और टैक्स कलेक्शन क्षमता का संकेत देता है। व्यक्तिगत आयकर का ग्रास कलेक्शन 9,53,871 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 1,56,972 करोड़ रुपये के रिफंड के बाद नेट कलेक्शन 7,97,080 करोड़ रुपये था। विकास के ये आंकड़े बताते हैं कि लोग अब पहले की तुलना में अधिक टैक्स चुका रहे हैं, जिससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।




