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अब पलक झपकते ही होगा ट्रांजेक्शन! आज से बदल गया UPI पेमेंट का ये तरीका, यूज करने से पहले करें चेक

भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) में कई अहम बदलाव किेए गए हैं। आज यानी 16 जून से UPI ट्रांजैक्शन सपोर्ट करने वाली टेक्नोलॉजी में कई बड़े अपग्रेड किए गए है।

नई दिल्‍ली, रफ्तार डेस्‍क । भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) में कई अहम बदलाव किए गए हैं। आज यानी 16 जून से UPI ट्रांजैक्शन सपोर्ट करने वाली टेक्नोलॉजी में कई बड़े बदलाव किए गए है। अगर किसी कारण से नेटवर्क फेल हो जाए और ट्रांजैक्शन UPI सिस्टम तक पहुंचने में नाकाम रहे, तो अब सिस्टम खुद ही उसे फेल करार घोषित कर देगा। 

इससे एप्स को बार-बार स्टेटस चेक करने की आश्‍यकता नही पड़ेगी। NPCI ने नियम बनाया है कि हर बैंक या पेमेंट एप 2 घंटे के अंदर अधिकतम 3 बार ट्रांजैक्शन का स्टेटस चेक कर सकते हैं। ऐसे में अगर आप PhonePe, Google Pay या Paytm जैसे किसी भी UPI ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। आज से पूरे भारत में UPI ट्रांजैक्शन पहले से कहीं ज्यादा तेज हो गए हैं।

 इसे लेकर नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनके तहत अब UPI भुगतान सिर्फ 15 सेकंड में पूरा हो जाएगा, जबकि पहले इसमें 30 सेकंड तक का समय लगता था।

UPI पेमेंट को लेकर किए अहम बदलाव?

तेज भुगतान प्रक्रिया

UPI ने पेमेंट को लेकर कई अहम बदलाव किए है। अब भुगतान तेज गति से होगा। पहले पैसे भेजने या प्राप्त करने में 25-30 सेकंड लगते थे, अब सिर्फ 15 सेकंड में ट्रांजैक्शन पूरा हो जाएगा।

तेज फेल ट्रांजैक्शन स्टेटस अपडेट

अगर किसी वजह से कोई ट्रांजैक्शन फेल हो जाए, तो अब आपको 10 सेकंड में यह पता चल जाएगा कि पैसा कटा या नहीं। पहले इसमें भी 30 सेकंड या उससे ज्यादा लगते थे।

बेहतर फेल ट्रांजैक्शन हैंडलिंग

पहले ऐप्स को 90 सेकंड तक इंतजार करना पड़ता था कि फंसा हुआ ट्रांजैक्शन सफल हुआ या नहीं। अब यह प्रक्रिया 45 से 60 सेकंड में पूरी हो जाएगी।

उदाहरण से समझें

अगर आप किसी दुकान पर ₹500 का भुगतान QR कोड स्कैन करके करते हैं, तो पहले यह पूरी प्रक्रिया लगभग 30 सेकंड लेती थी। अब यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ 15 सेकंड में पूरी हो जाएगी स्कैन करने से लेकर भुगतान कन्फर्मेशन तक।

तकनीकी दिक्कतों पर नियंत्रण

अगर नेटवर्क फेल हो जाए और ट्रांजैक्शन UPI सिस्टम तक पहुंच ही न पाए, तो अब सिस्टम खुद ही उसे फेल घोषित कर देगा। इससे एप्स को बार-बार स्टेटस चेक करने की जरूरत नहीं होगी।

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