नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। रिटायरमेंट की सुरक्षित योजना के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को सबसे भरोसेमंद विकल्पों में गिना जाता है। हालांकि, साल 2025 से लागू हुए NPS के नए नियम निवेशकों को जितनी राहत देते हैं, उतनी ही सावधानी की जरूरत भी पैदा करते हैं। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS के एग्जिट और विदड्रॉल नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। इन बदलावों का सही फायदा उठाया जाए तो रिटायरमेंट आसान हो सकता है, लेकिन एक गलत फैसला भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर भारी पड़ सकता है।
क्या हैं NPS के नए नियम
PFRDA के नए नियम खासतौर पर नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स यानी ऑल सिटिजन मॉडल और कॉरपोरेट NPS निवेशकों पर लागू होते हैं। सबसे अहम बदलाव अनिवार्य एन्युटी निवेश को लेकर किया गया है। पहले रिटायरमेंट पर कुल NPS कॉर्पस का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा एन्युटी में लगाना जरूरी था, लेकिन अब इसे घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके चलते निवेशकों को रिटायरमेंट के समय 80 प्रतिशत तक रकम एकमुश्त निकालने की छूट मिल गई है। कुछ विशेष स्थितियों में तो 100 प्रतिशत तक निकासी की अनुमति भी दी गई है।
एन्युटी नियम को हल्के में न लें
एन्युटी वह व्यवस्था है, जिससे रिटायरमेंट के बाद हर महीने नियमित पेंशन मिलती है। नए नियमों के तहत अगर किसी निवेशक का कुल NPS कॉर्पस 12 लाख रुपये से अधिक है, तो कम से कम 20 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होगा। यह नियम केवल 60 साल की उम्र में रिटायरमेंट लेने वालों पर ही नहीं, बल्कि 60 से 85 वर्ष के बीच NPS से एग्जिट करने वाले निवेशकों पर भी लागू होगा। यानी पेंशन की व्यवस्था पूरी तरह खत्म नहीं की गई है, बल्कि इसे न्यूनतम स्तर तक सीमित किया गया है।
कॉर्पस के हिसाब से निकासी के विकल्प’
नए नियमों में कॉर्पस के आधार पर अलग-अलग विकल्प तय किए गए हैं। अगर कुल NPS कॉर्पस 8 लाख रुपये तक है, तो निवेशक पूरी रकम एकमुश्त निकाल सकता है। कॉर्पस 8 से 12 लाख रुपये के बीच होने पर अधिकतम 6 लाख रुपये लंपसम निकाले जा सकते हैं, जबकि शेष रकम एन्युटी या किश्तों में लेनी होगी। वहीं, अगर कॉर्पस 12 लाख रुपये से ज्यादा है, तो 20 प्रतिशत एन्युटी में लगाना अनिवार्य होगा और 80 प्रतिशत राशि एक साथ निकाली जा सकेगी।
यहां हो सकती है सबसे बड़ी चूक
ज्यादा लंपसम निकासी की छूट देखकर कई निवेशक पूरी रकम एक साथ निकालने का फैसला कर लेते हैं। यहीं सबसे बड़ी गलती हो सकती है। रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन न होने पर बढ़ते मेडिकल खर्च, महंगाई और लंबी उम्र के कारण आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए केवल लंपसम के लालच में एन्युटी को नजरअंदाज करना भविष्य के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।
संतुलन बनाना है जरूरी
NPS के नए नियमों का फायदा तभी मिलेगा, जब निवेशक लंपसम और पेंशन के बीच संतुलन बनाए। विशेषज्ञों की मानें तो रिटायरमेंट के बाद नियमित आय के लिए पर्याप्त एन्युटी रखना बेहद जरूरी है। नए नियम लचीलापन जरूर देते हैं, लेकिन समझदारी से लिया गया फैसला ही रिटायरमेंट को वास्तव में सुरक्षित बना सकता है।




