नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । अगर आप प्राइवेट सेक्टर में काम कर रहे हैं और आपके नाम पर पीएफ जमा हो रहा है तो आपके लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने की तैयारी कर रही है।
दरअसल, सूत्रों से मिली जानकारी में बताया गया कि यह वृद्धि अगले कुछ महीनों में लागू की जा सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि हम न्यूनतम पेंशन राशि में 3,000 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी करने जा रहे हैं। वर्ष 2014 में केंद्र सरकार ने ईपीएफओ सदस्यों को दी जाने वाली न्यूनतम पेंशन को 250 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रति माह कर दिया था।
मंत्रालय ने प्रस्ताव को ठुकराया
उल्लेखनीय है कि, प्राइवेट सेक्टर में वर्क करने वाले कर्मचारियों के मूल वेतन का 12 फीसदी ईपीएफ खातों से कट जाता है। इसके अलावा, कंपनी भी इतनी ही राशि कर्मचारी के पीएफ खाते में जमा करती है। नियोक्ता द्वारा जमा की गई धनराशि में से 8.33 प्रतिशत ईपीएस (कर्मचारी पेंशन योजना) में जाता है, जबकि शेष 3.67 प्रतिशत ईपीएफ में जाता है। ईपीएस में जमा होने वाला पैसा सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद पेंशन के रूप में मिलता है। 2020 में श्रम मंत्रालय ने EPS के तहत न्यूनतम पेंशन 2,000 रुपये प्रति माह बढ़ाने का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय को भेजा था। लेकिन, वित्त मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी।
पिछले 11 वर्षों से कोई बढ़ोतरी नहीं
हाल ही में एक संसदीय समिति ने निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये करने की सिफारिश की थी। ट्रेड यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों की लंबे समय से मांग रही है कि न्यूनतम पेंशन कम से कम 1500 रुपये होनी चाहिए। 7,500 प्रति माह। उनका कहना है कि महंगाई बहुत बढ़ गई है, इसलिए पेंशन भी बढ़नी चाहिए। लेकिन पिछले 11 वर्षों से इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।




