नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) को लेकर सरकार और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने बड़े बदलाव किए हैं। अब NPS सिर्फ रिटायरमेंट के बाद पेंशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे म्यूचुअल फंड की तरह ज्यादा फ्लेक्सिबल बना दिया गया है। नए नियमों के तहत निवेशकों को किस्तों में पैसा निकालने, ज्यादा कैश हाथ में लेने और यहां तक कि लोन लेने की सुविधा भी मिल गई है।
85 साल तक निवेश की छूट
अब NPS में बने रहने की अधिकतम उम्र 75 से बढ़ाकर 85 साल कर दी गई है। यानी निवेशक लंबी अवधि तक अपना पैसा NPS में लगाए रख सकते हैं और बेहतर रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं।
एन्युटी की बाध्यता हुई कम
पहले रिटायरमेंट पर 40 फीसदी रकम एन्युटी में लगाना जरूरी था, लेकिन अब प्राइवेट कर्मचारियों के लिए यह सीमा घटाकर न्यूनतम 20 फीसदी कर दी गई है। इससे रिटायरमेंट के समय निवेशकों के हाथ में ज्यादा नकद राशि आएगी।
8 लाख तक पूरा पैसा निकालने की सुविधा
अगर किसी सब्सक्राइबर के NPS खाते में कुल राशि 8 लाख रुपये या उससे कम है, तो वह पूरी रकम एक साथ निकाल सकता है। हालांकि, सरकारी और निजी कर्मचारियों के लिए एन्युटी से जुड़े विकल्प अलग-अलग रखे गए हैं।
SUR से किस्तों में निकासी का नया विकल्प
नए नियमों की सबसे बड़ी खासियत Systematic Unit Redemption (SUR) है। यह म्यूचुअल फंड के SWP जैसा है, जिसके तहत 8 से 12 लाख रुपये फंड वाले निवेशक 6 लाख रुपये एकमुश्त निकालकर बाकी रकम कम से कम 6 साल तक किस्तों में ले सकते हैं।
60 साल से पहले और बाद में निकासी आसान
अब 60 साल से पहले 4 बार आंशिक निकासी की अनुमति होगी, जबकि 60 के बाद भी तय शर्तों के साथ पैसा निकाला जा सकेगा। इससे आपात जरूरतों में निवेशकों को राहत मिलेगी।
नागरिकता छोड़ने और लापता होने पर राहत
नए नियमों में यह भी प्रावधान है कि भारत की नागरिकता छोड़ने पर पूरा फंड निकाला जा सकता है। वहीं, किसी सब्सक्राइबर के लापता होने पर नॉमिनी को तुरंत 20 फीसदी राशि मिलेगी।
नाम में बदलाव और लोन की सुविधा
अब ‘Permanent Retirement Account’ की जगह ‘Individual Pension Account’ नाम होगा। साथ ही NPS अकाउंट को गिरवी रखकर बैंक से लोन लेने का विकल्प भी मिलेगा, जिससे यह एक लिक्विड एसेट बन गया है। कुल मिलाकर, PFRDA के ये बदलाव NPS को ज्यादा आधुनिक, निवेशक-अनुकूल और भरोसेमंद रिटायरमेंट प्लान बनाते हैं।




