नई दिल्ली, रफ्तार। इनकम टैक्स रिटर्न का ख्याल आते ही नौकरीपेशा लोगों को सबसे पहले फॉर्म-16 की जरूरत महसूस होती है। उनके लिए यही फॉर्म इनकम टैक्स रिटर्न भरते समय सबसे जरूरी होता है। आमतौर पर फॉर्म-16 एंप्लॉयर्स द्वारा जारी किया जाता है। इसमें किसी कर्मचारी को उस वित्त वर्ष के दौरान दिए गए वेतन और सोर्स पर काटे गए टैक्स (TDS) का ब्योरा दिया जाता है, लेकिन बहुत सारे सैलरीड लोगों, फ्रीलांसरों, कंसल्टेंट्स और अलग-अलग स्रोतों से कमाई करने वाले लोगों के पास फॉर्म-16 नहीं होता है। अब सवाल है कि फॉर्म-16 के बिना आयकर रिटर्न (ITR) भरने के लिए क्या करना होगा? इस स्थित में सैलरीड व्यक्ति को अपनी आय, कटौती और टीडीएस के विवरण के साथ मासिक या वार्षिक सैलरी स्लिप देनी चाहिए। गैर-नौकरीपेशा लोगों को वित्त वर्ष 2023-24 के इनकम डिटेल और चालान देने चाहिए। अपने सभी खातों के लिए बैंक विवरण हासिल करें। इसमें बचत खातों, सावधि जमा और अन्य आय स्रोत पर अर्जित ब्याज शामिल हैं।
इनवेस्टमेंट प्रूफ भी दें
वित्तीय वर्ष के दौरान विभिन्न धाराओं जैसे 80C (जैसे-LIC प्रीमियम रसीदें, PPF योगदान), 80D (जैसे-स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम रसीदें) और अन्य पात्र कटौती के तहत किए गए निवेश के प्रमाण इकट्ठा कर लें। अगर, टैक्सपेयर ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनता है तो इसकी जरूरत होगी। हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर मिलने वाली टैक्स छूट का दावा करना चाह रहे तो किराए की रसीदें दें। टैक्सपेयर ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनता है तो इसकी जरूरत पड़ेगी।
अपनी आय का ऐसे करें कैलकुलेशन
सभी जरूरी दस्तावेज इकट्ठा होने के बाद टैक्सपेयर को ग्रॉस टोटल इनकम का कैलकुलेशन करना होगा। इसके लिए टैक्सपेयर को ग्राहकों या एंप्लॉयर्स (अगर लागू हो) से मिली सैलरी स्लिप या इनकम डिटेलों के आधार पर पूरी कमाई का हिसाब लगाना होगा। सैलरीड हैं तो 50 हजार रुपए के स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ HRA और LTA पर मिलने वाली टैक्स छूट टैक्सेबल इनकम से कटेगी। कुल आमदनी को जोड़ते समय एफडी, बचत खाता, डाकघर बचत योजना समेत किसी स्रोत से हुई आय को शामिल जरूर करें।
इन आयों को जरूर शामिल करें
किराए से होने वाली आय, निवेश पर हुए पूंजीगत लाभ या अन्य स्रोत से हुई आय भी शामिल करें। आपको रिहायशी घर के किराए से आय होती है तो मेंटेनेंस के लिए 30% कटौती का दावा कर सकते हैं। भुगतान किए गए म्युनिसिपल टैक्स को भी जरूर घटाएं। होम लोन पर ब्याज चुकाया गया है तो उसे भी किराए की आय से घटाया जाना चाहिए। ग्रॉस टोटल इनकम का कैलकुलेशन होने के बाद आयकर अधिनियम की धाराओं के तहत मिलने वाले डिडक्शन और एग्जम्प्शन को समझें। आम कटौतियों में धारा 80-सी (जैसे-पीपीएफ, एनएससी, ईएलएसएस), धारा-80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, धारा-80जी शामिल हैं। आपके पास क्लेम किए सभी छूट के प्रूफ होने चाहिए।
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