नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । जब भी टैक्स की बात आती है, सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन इन दो शब्दों को लेकर होता है पहला इनकम टैक्स और टीडीएस कई लोग सोचते हैं कि ये दोनों एक ही चीज़ हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। अगर आप भी इस गलतफहमी में हैं तो हो जाइए सावधान, क्योंकि यह छोटी सी गलती आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है।
इनकम टैक्स क्या है?
यह एक सीधा टैक्स है जो आपकी सालाना कुल कमाई पर सरकार को देना होता है। चाहे वो सैलरी हो, किराए से इनकम हो, या फिर किसी FD से ब्याज सब पर टैक्स बनता है। हर व्यक्ति जिसकी इनकम तय सीमा से ज्यादा है, उसे ITR फाइल करके यह टैक्स देना होता है।
TDS क्या है?
TDS यानी “Tax Deducted at Source”, मतलब आपकी इनकम मिलने से पहले ही थोड़ा-थोड़ा टैक्स काट लिया जाता है।
जैसे आपकी कंपनी हर महीने सैलरी से TDS काटकर सीधे सरकार को भेज देती है। यह टैक्स का अडवांस पेमेंट है, जो बाद में आपकी टैक्स देनदारी में एडजस्ट हो जाता है।
जानिए क्यों जरूरी है ये फर्क जानना?
कई बार कंपनियां TDS ज्यादा काट लेती हैं, और आपको पता भी नहीं चलता। अगर आपने सही से ITR फाइल किया, तो सरकार आपको रिफंड देती है। और अगर आपने ध्यान नहीं दिया, तो आप ज्यादा टैक्स देकर नुकसान भी कर सकते हैं।
बता दें, टैक्स एक्सपर्ट के सीए विवेक शर्मा के अनुसार, TDS एक तरीका है टैक्स वसूलने का, जबकि इनकम टैक्स आपकी असली देनदारी है। दोनों को समझना हर टैक्सपेयर के लिए जरूरी है, वरना रिफंड भी छूट सकता है और पेनल्टी भी लग सकती है।
इनकम टैक्स: आप खुद देते हैं
जब आप पूरे साल में जो भी कमाई करते हैं, उस पर सरकार को एक हिस्सा टैक्स के रूप में देना होता है। इसे इनकम टैक्स कहते हैं। ये टैक्स आप खुद सरकार को देते हैं। अगर आपने साल भर में 10 लाख रुपएं कमाए, तो उसका कुछ हिस्सा सरकार को टैक्स के रूप में देना होगा ये आपकी ज़िम्मेदारी है।
TDS पहले ही काट लिया जाता है
अब मान लीजिए कोई कंपनी आपको सैलरी देती है या आप फ्रीलांसर हैं और किसी क्लाइंट से पेमेंट मिलती है, तो वो कंपनी या क्लाइंट आपके पैसे से थोड़ा हिस्सा पहले ही काटकर सरकार को दे देता है। इसे कहते हैं TDS (Tax Deducted at Source)।
जैसे: आपको 50,000 रुपएं की सैलरी मिलनी थी, लेकिन आपको 45,000 रुपये ही मिले। बाकी 5,000 रुपएं पहले ही टैक्स के रूप में सरकार को दे दिए गए।




