नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। देश की दिग्गज आईटी कंपनी इन्फोसिस ने एक बार फिर से विवाद खड़ा कर दिया है। कंपनी ने अपने मैसूर स्थित कैंपस से 400 ट्रेनी इंजीनियरों को निकाल दिया। कंपनी का कहना है कि इन्हें मूल्यांकन टेस्ट में तीन बार मौका दिया गया, लेकिन असफल होने के कारण यह निर्णय लिया गया।
टेस्ट बना नौकरी जाने की वजह
सूत्रों के अनुसार, इन ट्रेनी इंजीनियरों को ढाई साल के लंबे इंतजार के बाद कंपनी में जॉइनिंग मिली थी। पहले आईटी सेक्टर में मंदी के चलते उनकी जॉइनिंग टाल दी गई थी। अब जब कंपनी ने उन्हें अवसर दिया, तो कठिन मूल्यांकन परीक्षा में पास न होने के आधार पर बाहर कर दिया। इन इंजीनियरों का कहना है कि टेस्ट को जानबूझकर कठिन बनाया गया था ताकि वे फेल हो जाएं और कंपनी को उन्हें बाहर करने का बहाना मिल सके। निकाले गए इंजीनियरों के अनुसार, इन्फोसिस ने अपने कैंपस में बाउंसरों की तैनाती कर दी ताकि कोई विरोध न कर सके। इतना ही नहीं, उनके मोबाइल फोन तक जब्त कर लिए गए ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें। शाम 6 बजे तक सभी कर्मचारियों को कैंपस छोड़ने का आदेश दे दिया गया।
इन्फोसिस का बचाव, पुरानी प्रक्रिया बताई
कंपनी ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यह प्रक्रिया नई नहीं है। पिछले 20 सालों से यह मूल्यांकन प्रक्रिया लागू है और कर्मचारियों को नौकरी जारी रखने के लिए परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। निकाले गए कर्मचारियों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि उनके लिए अब कोई दूसरा अवसर नहीं बचा है। कई कर्मचारी सदमे में आ गए और कुछ तो बेहोश तक हो गए। आईटी कर्मचारियों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था Nascent Information Technology Employees Senate (NITES) ने इस मामले को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय तक पहुंचाने का फैसला किया है। संस्था ने इसे कॉरपोरेट शोषण बताते हुए सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। इस घटना के बाद आईटी सेक्टर में जॉब सिक्योरिटी पर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनियां मंदी का बहाना बनाकर इस तरह से युवाओं का शोषण कर रही हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।




