नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। इंफोसिस के सह संस्थापक उस न सिर्फ चर्चा में आ गए थे बल्कि सोशल मीडिया पर आलोचना का शिकार होने लगे थे जब उन्होंने एक हफ्ते में 70 घंटे काम करने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि “मैंने अपने करियर में 40 साल तक हर हफ्ते 70 घंटे से अधिक काम किया। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। लिहाजा 70 घंटे काम करने में कोई बुराई नहीं है। हालांकि अब उस बयान पर उनकी सफाई आ गई है। उन्होंने कहा कि हफ्ते में 70 घंटे काम करने के लिए किसी को भी मजबूर नहीं किया जा सकता।
“मैनें 40 साल तक 70 घंटे काम किया है”
सोमवार को इंफोसिस के सह संस्थापक मुंबई पहुंचे थे। वहां पर उन्होंने किलाचंद स्मृति व्याख्यान में भाग लिया था। व्याख्यान को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि मेरे 70 घंटे काम करने वाले बयान के गलत संदर्भ में लिया गया। उन्होंने कहा कि “मेरे बयान का मतलब किसी से जबरन हफ्ते में 70 घंटे काम करवाना नहीं था। किसी से भी जोर देकर ऐसा नहीं कराया जा सकता। जिन्हें लगता है कि आपकी जरूरत 70 घंटे काम करने की है तो आप कर सकते हैं वर्ना नहीं।” उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि “मैंने अपनी जिंदगी के 40 साल तक एक हफ्ते में 70 घंटे काम किया है तब जाकर आज मैं इस मुकाम पर पहुंच सका हूं।”
“इस मुद्दे पर बहस जरूरी नहीं बल्कि आत्ममंथन जरूरी”
नारायण मूर्ति ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि इस मुद्दे को बहस का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। इसपर बहस करने की जगह इस विचार पर आत्ममंथन करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि मैने केवल सलाह दी थी, इसे अपने जीवन में उतारना या न उतारना सबका निजी फैसला है। हालांकि विचार करते समय इस बात को केंद्र में रखा जाना जरूरी है कि आपकी कार्यक्षमता समाज के लिए कितनी लाभदायक साबित हो सकती है।





