नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। रोजमर्रा की जरूरतों का सामान सस्ता होने से अब आम आदमी को महंगाई से राहत मिल गई है। खासतौर पर उन लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है, जिनका बजट दाल-रोटी और सब्जी पर ही टिका होता है। देश में सितंबर 2019 यानी करीब 6 सालों के बाद से महंगाई दर सबसे कम हुई है। अगस्त 2019 में खुदरा महंगाई दर 3.28% रही थी। इसकी तुलना में फरवरी 2025 में रिटेल इंफ्लेशन 3.61% रहा था, जबकि एक साल पहले इसी महीने यानी मार्च 2024 में यह आंकड़ा 4.85 % रहा था।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने मंगलवार को आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार खाने-पीने की चीजों की कीमतें कम होने के कारण महंगाई में गिरावट आई है। यह गिरावट खासतौर पर खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी के चलते आई है। जिनमें अनाज की महंगाई 5.93 फीसदी रही जबकि दालों की कीमतों में 2.73 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। फूड इंफ्लेशन मार्च में 2.69 फीसदी पर आ गया, जो फरवरी में 3.75 फीसदी था। सब्जियों की महंगाई में तो बड़ी गिरावट आई, फरवरी में जहां -1.07 फीसदी की गिरावट थी, वहीं मार्च में ये गिरकर -7.04 फीसदी हो गई।
आम आदमी को राहत कैसे?
हमारे देश में मध्यमवर्गीय घरों का बजट दाल-रोटी और सब्जी पर ही टिका होता है। आंकड़ों के अनुसार अनाज की महंगाई दर 5.93 फीसदी रही जबकि दालों की कीमतों में 2.73 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। इसके अलावा ईंधन और बिजली की महंगाई भी घटकर 1.48 फीसदी रह गई है। जबकि ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में महंगाई दर में कमी आई है। ग्रामीण महंगाई फरवरी के 3.79 फीसदी से घटकर 3.25 फीसदी हो गई है और शहरी महंगाई भी अब 2.48 फीसदी पर आ गई है।
अब आगे और राहत की उम्मीद
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि महंगाई में गिरावट का ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा। अगले दो महीनों तक गर्मी और मानसून के सीजन में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति और कीमतों पर असर होगा। यदि मौसम अनुकूल रहा और फसलों की पैदावार अच्छी रही तो महंगाई दर और नीचे आ सकती है। लेकिन यदि बारिश कम हुई या सप्लाई चेन में कोई दिक्कत आई, तो महंगाई फिर से बढ़ भी सकती है। मार्च 2025 में खुदरा महंगाई दर का 3.34% पर आना एक सकारात्मक संकेत है।
हालांकि RBI ने यह भी संकेत दिया है कि वैश्विक अनिश्चितता भी एक बड़ा खतरा है। हाल ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सहित कई देशों पर 26 फीसदी आयात शुल्क लगाया था, हालांकि चीन को छोड़कर बाकी देशों को 90 दिनों की राहत भी दी गई है।





