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Monday, March 23, 2026
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महंगाई नापने सरकार का बड़ा प्लान, अब Blinkit-Zepto को भी सीपीआई में करेगें शामिल

भारत में रिटेल महंगाई नापने अब RBI सीपीआई में ब्लिंकइट, जेप्टो और बिगबास्केट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की कीमतों को भी करेगा शामिल।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। देश में बढ़ती महंगाई को जानने के लिए हर साल भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सरकार अपनी मौद्रिक नीति यानी रेपो रेट की दरें तय करता है। इससे एक फिक्स बास्केट के लिए अलग-अलग मार्केट प्राइस को ट्रैक करना होता है वहीं अब इसमें सरकार ने एक औरन बदलाव किया है जिसमें अब जल्द सरकार ब्लिंकइट और जेप्टो जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद प्रोडक्ट के प्राइस भी जोड़ सकता है इससे आखिर सरकार क्या बना रही प्लान जाने पूरी खबर डिटेल में। 

अभी देश में महंगाई के गणना से ग्राहक की कीमतों इंडेक्स यानी सीपीआई के मुताबिक तय होता हैजो एक तय बास्केट के लिए अलग-अलग बाजार कीमतों को रेपो रेट की दरें तय करता है, सरकार ने इसी सीपीआई में ब्लिंकइट, जेप्टो और बिगबास्केट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मौजूद सामान की कीमतों को शामिल करने का प्लान बनाया ट्रैक करता है जिसमें अब सरकार द्वारा ब्लिंकइट और जेप्टो बिग बास्केट जैसें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के कीमतों को भी जोड़ेगी। 

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अपनी मौद्रिक नीति की रेपो रेट की दरें को तय किया जाता है, उसके लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी सीपीआई के कैलकुलेशन को बेस प्राइस बनाता है। वैसे देश में कइ वर्षेा से महंगाई नापने के लिए सीपीआई का इस्तेमाल होता रहा है अब इसमें सरकार कंज्यूमर के खरीदारी के बदलते पैटर्न को देखते हुए सरकार ने सीपीआई में बदलाव की योजना बनाई है। 

फिलहाल, सीपीआई के तहत ग्रॉसरी से लेकर टेलीफोन के बिल, पेट्रोल-गैस की कीमत इत्यादि को मिलाकर एक सामान के बास्केट तैयार की जाती है जिसे फिर अलग-अलग मार्केट में उस बास्केट की कॉस्ट के आधार पर इंडेक्स बनाकर महंगाई की गिनती होती है। 

12 शहरों से कलेक्ट होगा डेटा

इस बार सरकार ऑनलाइन खरीदारी का डेटा देश के 12 ऐसे शहरों से जुटाऐगी, जहां 25 लाख से ज्यादा की आबादी है. इन शहरों में लोगों के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से खरीदारी करने, उन प्लेटफॉर्म्स पर सब्जी-फलों से लेकर ग्रॉसरी के सामान की प्राइसिंग तक का डेटा सरकार जुटाएगी। इसके आधार पर फिर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स बनाया जाएगा। इससे सरकार को शहरों में गांव निचले स्तरों पर म‍हंगाई कें आकलन की सुविधा मिलेगी। इससे देश में कंज्यूमर के व्यवहार में आ रहे बदलाव को समझने का मौका मिलेगा। जिससे आगे चलकर इस नए पैटर्न पर बेस्ड सीपीआई डेटा को 2026 से जारी करना शुरू कर सकती है।

कैसे कलेक्ट होगा ऑनलाइन डेटा?

डेटा कलेक्ट करने के लिए सरकार शहरों से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उस शहर के लीडिंग ऑनलाइन सेलर को सिलेक्ट करेगी । जिससे उससे कीमतों का डेटा जुटाए। हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार, सरकार चाहे तो लखनऊ जैसे शहर से चावलों की कीमत के लिए बिग बास्केट को चुन सकती है। तो वहीं बेंगलुरू में जेप्टो या अमेजन हो सकता है। अभी सीपीआई सरकार करीब एक हजार एक सौ इक्यासी ग्रामीण और एक हजार एक सौ चौदह शहरी बाजार से डेटा कलेक्ट करती है। नए पैटर्न में बदलाव के बाद देश में टोटल 2900 मार्केट से ग्राहक कीमतों इंडेक्स के लिए रिटेल कीमत का डेटा जुटाएगा। इतना ही नहीं नए सीपीआई में मोबाइल, इंटरनेट, केबल टीवी जैसे रिचार्ज के डेटा के साथ ऑनलाइन ओटीटी प्लेटफॉर्म, हवाई और रेल यात्र की कीमतों को भी शामिल किया जा सकता है। इससे सीपीआई के बेस ईयर भी 2012 से बदलकर 2024 करने का प्लान है।

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