नई दिल्ली, रफ्तार। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने छोटे निवेशकों को राहत भरी खबर दी है। इसने शेयर मार्केट में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बेसिक डीमैट अकाउंट की लिमिट बढ़ाने वाली है। संस्था ने बताया है कि बेसिक सर्विस डीमैट अकाउंट की लिमिट को 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए करने पर विचार कर रही है। दरअसल, बेसिक सर्विस डीमैट अकाउंट, डीमैट अकाउंट का छोटा वर्जन है। इसकी शुरुआत 2012 में की गई थी।
निवेश को आसान बनाने की कोशिश
SEBI ने कहा है कि सिक्योरिटी मार्केट में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए निवेश को आसान बनाना होगा। इसके लिए बेसिक सर्विस डीमैट अकाउंट की सुविधा की गहन समीक्षा की गई। सेबी ने प्रस्ताव में कहा कि डीमैट अकाउंट में रखी सिक्योरिटीज की वैल्यू किसी समय लोन एवं अन्य प्रतिभूतियों के लिए 10 लाख रुपए से अधिक नहीं होना चाहिए।
4 लाख से ऊपर लगेगा शुल्क
SEBI ने पात्रता स्टैंडर्ड को लिस्ट करते हुए कहा कि किसी के पास एक ही डीमैट अकाउंट हो। उसमें वह एकमात्र अकाउंट होल्डर हो। उसके पास सभी डिपॉजिटरी में उसके नाम से केवल एक बेसिक सर्विस डीमैट अकाउंट हो। सेबी ने BSDA के लिए अधिकतम वार्षिक शुल्क की समीक्षा करने का प्रस्ताव भी दिया है। संस्था ने प्रस्ताव पत्र में कहा कि 4 लाख रुपए तक के पोर्टफोलियो के एनुअल मेनटिनेंस फीस नहीं ली जाएगी। 4 लाख से 10 लाख रुपए तक के पोर्टफोलियो पर 100 रुपए सालाना शुल्क लगेगा। अगर, किसी व्यक्ति का पोर्टफोलियो 10 लाख रुपए से अधिक है तो बेसिक सर्विस डीमैट अकाउंट को डीमैट अकाउंट में बदलना चाहिए।
बेसिक डीमैट अकाउंट क्या है?
बेसिक डीमैट अकाउंट ऐसा अकाउंट होता है, जिसमें बेसिक सुविधाएं होती हैं। इस अकाउंट की मेंटेनेंस कॉस्ट कम लगता है। यह उन खुदरा निवेशकों के लिए है, जो शेयर, बॉन्ड्स, ETF, म्यूचुअल फंड्स आदि में नियमति तौर पर निवेश नहीं करते।
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